क्यों लुट गया सारा अमन?

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naveen mani

पूछिए मत क्यों हमारी शोखियाँ कम पड़ गईं।
जिंदगी गुजरी है ऐसे आंधियाँ कम पड़ गईंll 

भूख के मंजर से लाशों ने किया है यह सवाल।
क्या ख़ता हमसे हुई थी,रोटियां कम पड़ गईंll 

जुर्म की हर इंतिहा ने कर दिया इतना असर।
अब हमारे मुल्क में भी बेटियां कम पड़ गईंll 

मान लें कैसे,उन्हें है फिक्र जनता की बहुत।
कुर्सियां जब से मिली हैं,झुर्रियां कम पड़ गईंll 

इस तरह बिकने लगी है मीडिया की साख भी।
जब लुटी बेटी की इज्जत,सुर्खियां कम पड़ गईंll 

मैच फिर खेला गया कुर्बानियों को भूलकरl
चन्द पैसों के लिए रुसवाइयाँ कम पड़ गईंll 

मत कहो `हीरो` उन्हें तुम,वे खिलाड़ी मर चुके।
दुश्मनों के बीच जिनकी खाइयां कम पड़ गईंll 

हो गया नीलाम बच्चों की पढ़ाई के लिए।
जातियों के फ़लसफे में रोजियाँ कम पड़ गईंll 

क्यों शहर जाने लगा है गांव का वह आदमी।
नीतियों के फेर में आबादियां कम पड़ गईंll 

देखते-ही-देखते क्यों लुट गया सारा अमन।
कुछ लुटेरों के लिए तो बस्तियां कम पड़ गईंll 

सिर्फ अपने ही लिए जीने लगा  है आदमी।
देखिए अहले चमन में नेकियाँ कम पड़ गईंll 

यह सही  है बेचने वह  भी  गया ईमान को।
गिर गया बाज़ार,सारी बोलियाँ कम पड़ गईंll 

                                                                             #नवीन मणि त्रिपाठी

परिचय : नवीन मणि त्रिपाठी कानपुर(उत्तरप्रदेश)के अर्मापुर रियासत में रहते हैंl आपका जन्म १९७५ का हैl 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।