आओ मतदान करें

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niraj tyagi
लड़ रहे है राजनीति के जादूगर कुत्ते बिल्ली की तरह,
अपनी झूठी-झूठी बातो से,ये फिर से लोगो का मन हरे।
भोली भाली जनता हर बार ही इनकी बातो में आ जाती।
इन्हें  जिताकर  खुशी –  खुशी  फिर  इनके  जूते  खाते।।
कोई ग़ांधी-ग़ांधी करता,कोई  मोदी के नाम को रोता है।
बार बार इनकी लातो को खाकर आम आदमी ही रोता है।।
सत्ता के गलियारों में हर रोज नए नए परिंदे आते है।
समझदार हो कितना भी कोई,पर इनसे मात खाते है।।
चमचों की भीड़ बहुत इनके इर्द गिर्द मंडराती है।
इनकी थोड़ी सी दारू पीकर अपनो को बहकाते है।।
सम्हल जाओ अब लोगो ना बार बार तुम चोट खाओ।
अपने लिए कर रहा जो काम बस उसी को वोट दे आओ।।
#नीरज त्यागी 
ग़ाज़ियाबाद (उ. प्र)
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Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।