नई कविता

0 0
Read Time1 Minute, 9 Second

devendr soni

कई सालों से देख रहा हूँ,                                                                                 मंदिर के बाहर एक कोने में बैठी,                                                                        अस्सी के आस-पास होती उम्र की उस वृद्धा को।

जिसे होती है उम्मीद कि,
आने-जाने वाले भक्तों से
इतना तो मिल ही जाएगा उसे,
जिससे निकल जाएगी रात
आधा-दूधा खाकर परिवार की।

इसी उम्मीद में सह जाती है वह,
बदन को थरथराती ठंड
ग्रीष्म की तपन और,
बरसात का पानी भी।

पाया है मैंने हमेशा ही,
उसके झुर्रीदार पोपले चेहरे पर
गजब का आत्मसंतोष।

देखकर उसे सोचता हूँ,अक्सर ही,
क्यों नहीं है-सब कुछ पाकर भी
वह प्रेममयी मुस्कान और,
आत्मसंतोष,चेहरे पर हमारे।

मांगती वह भी है और,
मांगते हम भी हैं,मंदिर जाकर।

नहीं मिलता है उसे भी और हमें भी,
रोज उम्मीद के मुताबिक
पर,फिर भी रहती है वह सन्तुष्ट,
और हम असंतुष्ट,क्यों…?

                                                  #देवेन्द्र सोनी

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

बेटियां हैं अनमोल रतन

Sat Oct 14 , 2017
बेटियाँ तो हैं अनमोल रतन, इनका सब करो रे जतनl न मारो इनको  कोख में यूँ ही, इनसे ही खिला रहे घर-आंगनl बेटियां तो हैं कली गुलाब की, कच्ची उम्र में न ब्याहो बाबुलl शिक्षित करो बिटिया को अपनी, उसे तुम बोझ न समझो माँ-बाबुलl बेटी जीएगी तो ही हमें […]

नया नया

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।