उतर गये पार संसार-सागर के,   हर मोड़-पड़ाव से आगे,   बहुत आगे;   अब पकड़ से परे,   जकड़ से दूर-   दद्दा (पिता) हमारे….   चार बरस पहले की वह तिथि   राखी के अगले दिन लगते भादों प्रतिपदा   […]

पुस्तक समीक्षा – सच , समय और साक्ष्य  शिवना प्रकाशन , सीहोर । मूल्य – 175 ₹  कोमलता से चुभन का यथार्थ एहसास कराती हैं शैलेन्द्र की कविताएं बैंक प्रबंधक के पद पर रह कर वित्तीय आंकड़ों में उलझते- सुलझते सेवानिवृत हुए प्रेम और मानवीय संवेदनाओं के कुशल चितेरे कवि […]

पत्रिका समीक्षा …………….. किसलय साहित्यिक संस्था की अनियतकालीन पत्रिका शब्दध्वज ने कवि एवं सम्पादक पंकज पटरियां की कविताओं पर केंद्रित काव्य संग्रह ” धूप आती तो है ….” का प्रकाशन किया है। नर्मदांचल के साहित्य और पत्रकारिता जगत में पंकज पटेरिया एक लब्ध प्रतिष्ठित  नाम है । शब्द ध्वज जिसके […]

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अहिन्दी भाषी क्षेत्र गुजरात के सुरेंद्र नगर में यदि किसी साहित्यकार और सम्पादक का नाम ससम्मान और प्रमुखता से लिया जाता है तो वे हैं – श्री पंकज त्रिवेदी जी । वे गुजराती बहुल क्षेत्र में हिन्दी का परचम लहराते हुए हिन्दी साहित्य की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने […]

पुस्तक समीक्षा………………. किसी भी विधा में लेखन हो उसका भावनाओं से गहरा सम्बंध होता है फिर यहां तो सद्य प्रकाशित काव्य संग्रह – कहाँ हो तुम की लेखिका का नाम ही भावना है ! उनकी विविध भावनाओं की अभिव्यक्ति ही इस संग्रह को सार्थकता , पठनीय और अपने पुस्तकालय में […]

छोटे बेटे की बीमारी से परेशान सुनीता जैसे तैसे अपने दिन काट रही थी । मजदूर पति सुरेश सुबह ही दिहाड़ी के लिए निकल जाता । मजबूरी थी उसकी बीमार बेटे को अनपढ़ पत्नी के भरोसे छोड़ कर जाना । खुद भी ज्यादा कहाँ पढ़ा – लिखा था वह। आठवीं […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।