शजर -पेड

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शजर की चाह थी कि परिंदों को आसरा दे ।
फिजा ने कुछ और ही दिखाया है नजारा ।।

जईफ हुआ शजर,जज्ब भी लुप्त हुआ है।
इसका आसरा देने का जज्बा अभी जवां है ।।

कुछ इस कदर खस ने इसे हर तरफ घेरा है।
सूरज की धूप से भी इसका अंतर्मन तपा है।।

गर्दिशे दौरां का असर कुछ इस कदर हुआ है।
इसके अपने बजूद ने इसका साथ छोड़ा है।।

दामनगिर भी इसे खाक में मिलाने को है।
कुल्फ़त ऐसी है इसकी,जमीं ने दरकिनार किया है।।

नीरज त्यागी
ग़ाज़ियाबाद ( उत्तर प्रदेश )

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श्रीमत

Thu Feb 6 , 2020
मन मत पर चलो नही राह से कभी भटको नही ठगनी माया से बचकर रहो नीचे कभी तुम गिरो नही व्यसनों से तौबा कर लो सद्गुणों से झोली भर लो परमात्म याद की राह चलो पतित से पावन बन चलो श्रीमत पर चलना सीख लो शांत मन रहना सीख लो […]

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Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।