मजबूरी

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krishn modak
हालातों की बेड़ियों से बंधा,
‘बंदा ‘वो बड़ा मजबूर  है।
बहना के ब्याह की चिंता से,
वो आज घर से बहुत दूर है।
ज़ख्म पर नमक डालकर,
उसके घाव को हम करते नासूर हैं।
बाल बिखरे,कपड़े व्यवस्थित नहीं,
तो समझते उसको हम धूर्त हैं।
रहन-सहन में परिवर्तन करे
तो कहते उसके अंदर ग़ुरूर है।
सहता जाता वक़्त की मार,
किन्तु स्वयं में वो बेक़सूर है।
रात-दिन परिश्रम करता जात,
उसमें समाया मानो फ़ितूर है।
चाहे जो कुछ भी हो ,
परिवार स्वयं चलाता है।
कोयले की खान से निकला,
वो हीरा कोहिनूर है।
हालातों की बेड़ियाँ हैं साहब,
तभी वो आज घर से दूर है॥
                                                #कृष्णा कुमार मोदक
परिचय: कृष्णा कुमार मोदक की जन्मतिथि-१२ जून १९९५ और शहर-धनबाद है। आपका निवास झारखंड राज्य के धनबाद शहर में है। शिक्षा-यांत्रिक अभियांत्रिकी में डिप्लोमा एवं कार्यक्षेत्र-रेलवे में कार्यरत है। आपके लेखन का उद्देश्य-सीखते रहना है।
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matruadmin

One thought on “मजबूरी

  1. Bhai Krishna bhai gazab,, We proud of you,, sab samay ka khel hai,, and pariwartan hi sansar ka nimay hai,, so jo aaj hai kal na hoga,, sab badalte hai insab v aur unke halaat v,, so muskilo me kabhi ghabrao mat bas sikhte jao,, zindagi ko muskura ke jiyo,, sukh dukh sab temporary hai,, so inse upar uth ke,, ek ache aur safal vaikti bano,, hamari subhkamnaye apke sath hai..

    aur ha apki lekan kala bahut umda hai,, kripa aise hi likhte rahiye,, apse mil k acha laga tha mujhe,, and and hame garv hai hmara koi aisa dost v hai,, zindagi me khub tarakki kriye..

    apka mitra
    Shubham Sharma

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।