सजा प्यार की

Read Time2Seconds

sudha kanouje

सोनू को उसकी सहेलियां,`सोनू` नाम से कम,`माधुरी दीक्षित` नाम से अधिक पुकारती थी। उसकी सुंदरता के चर्चे सारे शहर में थे। उस पर उसकी सादगी और संस्कारों ने उसकी सुंदरता में चार चांद लगा दिए थे।
सोनू के घर से कुछ ही दूरी पर सुनील नाम का ब्राम्हण लड़का रहता था। धीरे-धीरे सोनू और सुनील करीब आने लगे,किन्तु सुनील का प्यार सिर्फ दिखावा है,सोनू इस बात से विल्कुल अंजान थी।
दोनों के चर्चे जोर-शोर से मुहल्ले,पड़ोस,शहर में होने लगे। तब सोनू की माँ ने जो एक शिक्षिका थी,सोनू को बहुत समझाने की कोशिश की -`बेटा सुनील जाति का ब्राम्हण है और हम छोटी जाति केl सुनील के परिवार वाले इस रिश्ते को कभी स्वीकार नहीं कर सकते, इसलिए तेरी मौसी ने जो लड़का बताया है वह कॉलेज में प्रोफेसर हैl मानव की शादी में उन लोगों ने तुझे देखा था,तभी से वे लोग मौसी से रिश्ते की बात करने के लिए कह रहे हैं, पर तेरा दिमाग ठीक न होने के कारण मैं कुछ जबाब नहीं दे पा रही हूँ। बेटा,मैं तुझे आखिरी बार समझा रही हूँ,कि सुनील तुझसे शादी नहीं करेगा। उसके पीछे तू अपनी जिंदगी बर्बाद न कर,हम सबके लिए यही अच्छा होगा कि तू शादी के लिए हाँ कर दे।`
माँ के समझाने का सोनू पर कोई असर नहीं हुआ। उसको तो बस एक सुनील ही सच्चा जीवनसाथी दिखाई दे रहा था।
उधर सुनील के घरवालों ने सुनील की चुपचाप शादी भी तय कर दी। `चट मंगनी-पट ब्याह` की सोचकर सबसे ये बात छुपाकर रखी। सोनू को उस दिन खबर लगी,जिस दिन सुनील की सगाई हुई।
सुनील पर इतने पहरे लगा दिए गए कि,सोनू का सुनील से मिलना नामुमकिन हो गया। तीसरे दिन सुनील की धूमधाम से उसी के दरवाजे के सामने से बारात भी निकल गई।
सोनू के दिल पर क्या बीती,यह कोई नहीं समझ सका…l  सुनील के घरवालों को सोनू से क्या मतलब, उन्होंने तो एक जंग जीती थी। प्यार की इस जंग में सोनू ठगी गई। सोनू इस धोखे को सहन नहीं कर सकी और सुबह चार बजे,जब सब लोग गहरी नींद में थे,तब अपने ऊपर केरोसिन डालकर खुद को आग के हवाले कर दिया। सुनील के घर खुशियां थी,सोनू के घर मातम। सोनू अगर थोड़ी हिम्मत से काम लेती तो,उसके घर में भी खुशियां होती, और शायद वह सुनील को अच्छा सबक भी सिखा देती। 

                                                                    #सुधा कनौजे 
परिचय : श्रीमती सुधा कनौजे मध्यप्रदेश के दमोह में न्यू हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी (विवेकानंद नगर) में रहती हैंl श्रीमती कनौजे दमोह के  जिला शिक्षा केन्द्र में एपीसी(जेण्डर) हैंl 
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

भाषा और संस्कृति का नाता अनान्योश्रित

Thu Sep 7 , 2017
 डॉ. मनोहर भण्डारी…….. मातृभाषा किसी व्यक्ति,समाज,संस्कृति या राष्ट्र की पहचान होती है। वास्तव में भाषा एक संस्कृति है, उसके भीतर भावनाएं, विचार  और सदियों की जीवन पध्दति समाहित होती है। मातृभाषा ही परम्पराओं और संस्कृति से जोड़े रखने की एकमात्र कड़ी है। राम-राम या प्रणाम आदि सम्बोधन व्यक्ति को व्यक्ति से तथा समष्टि से जोड़ने वाली सांस्कृतिक […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।