आकर्षण के केन्द्र अनोखे ट्री – हाउस

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‘सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीन’। आजकल के व्यस्त जीवन में एक ऐसे यात्रा की बहुत जरूरत है जो यादगार बने। घूमना और दुनिया देखना कौन नहीं चाहता, काम की थकान के बीच में किसी खूबसूरत जगह की यात्रा, एक नयी ऊर्जा देती है। छुट्टियों का मतलब ही होता है रोज़मर्रा की दौड़ धूप और थकान से दूर किसी खूबसूरत, शांत, अद्भुत, प्राकृतिक जगह पर खूबसूरत पल गुजारना और उन लम्हों को संजोकर रखना।

वैसे तो हम सभी यात्रा के दौरान होटल में रहते हैं। क्यों न इस बार कुछ अलग किया जाये। होटल के बजाय इस बार ‘ट्री हाऊस ‘ में रुकने का प्लान करें और अपने आप को रोमांचित करें। जी हाँ, हम उसी ट्री हाउस की चर्चा कर रहे हैं जिसे हम अक्सर किताबों, फिल्मों या टेलीविजन पर देखते हैं। ये ‘ट्री हाउस’ पेड़ों पर बनें होते हैं। इनमें होटल जैसी सुख सुविधायें होती हैं। आज हम भारत में निर्मित इन्हीं अनोखे व खूबसूरत ‘ट्री हाउस’ के बारे में चर्चा करेंगे।

ईगल आई-
चिकमगलूर शहर भारत के कनार्टक राज्य के चिक्कमगलूरू जिले में है। मुल्लयनागिरी पवर्त क्षेणियों की तलहटी में यह अपनी चाय-काफी के बागानों के साथ साथ प्राकृतिक नजारों का अनोखा संगम समेटे हुए है। यह रिसाट्स समुद्र तल से 2900 फीट की ऊँचाई पर है। यहाँ से आप चारों ओर फैले हुए पहाड़ों और अद्भुत सनसेट को देख सकते हैं। इसको देखना एक नया अनुभव होगा।

वान्या ट्री हाउस-
यह केरल के थेकडी़ में स्थित है। यहाँ से खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों का बेहद करीब से आनन्द लिया जा सकता है। केरल तो वैसे भी प्रकृति के खजाने से ओतप्रोत है। थेकडी केरल का प्रमुख हिल स्टेशन भी है।

ट्री हाउस काटेज –
हिमाचल प्रदेश के शहर मनाली में भी ट्री हाउस का आनंद लिया जा सकता है, यह काटेज सेब, अखरोट और बेर के बागानों से घिरा हुआ है। यहाँ रहने पर एक अद्भुत ही रोमांच का अनुभव होगा। यहाँ आपको घर जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं और यहाँ से प्रकृति की खूबसूरती देखते ही बनती है जो आपके दिल व दिमाग में एक अमिट छाप छोड़ती है।

बाइथिरी रिसाट्स-
वायनाड, दक्षिण भारत का केरल राज्य अपनी अद्भुत प्राकृतिक खूबसूरती के चलते हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। वैसे तो पूरा केरल ही घूमने लायक है पर अगर प्रकृति के बहुत करीब रहना है तो वायनाड की सैर जरूर करें। ये प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग है। उत्तर-पश्चिम केरल के वायनाड के घने ‘रेनफारेस्ट’ के बीच स्थित है। यहाँ पर स्वीमिंग पूल, फिटनेस सेंटर, स्पा सेंटर, जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही जंगल में ठहरने का मौका भी मिलता है। भारत का सबसे बड़ा ट्री- हाउस यहीं है।

दि ट्री-हाउस रिसोर्ट-
जयपुर में स्थित यह रिसोर्ट एक बेहद ही विशाल पेड़ पर बना है। यहाँ से स्यारी घाटी की तलहटी में स्थित अरावली पहाडि़यों की खूबसूरती का नज़ारा भी लिया जा सकता है। यह नेशनल हाइवे-11 से 1•9 किलोमीटर की दूरी पर है। इस आकर्षक और हवादार ट्री हाउस में अनेक सुविधायें भी उपलब्ध हैं। यहाँ खुली जगह पर भारतीय और दुनिया के मशहूर पकवान परोसने वाले ट्री- हाउस रेसटोरेट, लगून (झील की तरह दिखने वाले आउटडोर पूल), गेमरूम और लाइब्रेरी की सुविधायें हैं।

सफारी लैंड रिसोर्ट-
जंगलो मे पेड़ के ऊपर रहने का मजा लेना चाहते हैं तो यह मसिनागुड़ी जगह आपके लिए बिल्कुल सही है । तमिलनाडु में मैसूर जाने वाले रास्ते में बनें छोटे से शहर मसिनागुडी जंगलों में पेड में बना यह ट्री-हाउस प्रकृति प्रेमियों के लिए बहुत ही रोचक जगह है। 5 एकड़ मे फैले इस रिसोर्ट की खासियत यह है कि यहाँ से आप चारों ओर फैले हुए प्राकृतिक सौंदर्य व दूर बहते झरनों की आवाज़ सुन सकते हैं, साथ ही जंगली जानवरों के भी दर्शन होते हैं।

ट्री-हाउस हाईडअवे-
हरे भरे जंगलों में रहने के लिए यह जरूरी नहीं है कि आप पहाड़ों पर ही जायें। मैदानी इलाकों के लोगों के लिए यह अनुभव लेने की सबसे उत्तम जगह है। मध्यप्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान बांधवगढ़ में, यहाँ पर बनें ट्री-हाउस से आप जंगलों का आनंद ले सकते हैं। यहाँ रहने पर आप को ऐसा महसूस होगा कि आप जंगल में ही हैं। यह ट्री-हाउस नेशनल पार्क के 21 एकड़ डेस फारेस्ट में फैला है। इस रिसोर्ट में फाइव स्टार होटल के जैसी सुविधाएं उपलब्ध है। यहाँ आप को माडर्न व नैचुरल आर्किटेक्ट का कॉम्बिनेशन देखने को मिलेगा।

हिमालयन विलेज ट्री-हाउस-
मनाली के पर्वतीय घाटी में भी आप इस ट्री-हाउस का आनंद ले सकते हैं , जो लकड़ियो से बना होता है, इसे भड़ारस कहते हैं। यह जमीन से 50-60 फीट ऊँचा है।

मचान-
अगर आप शांति वाली जगह पर छुट्टियाँ बिताना पसंद करते हैं तो महाराष्ट्र के लोनावाला में मचान एकदम परफेक्ट जगह है। यह ट्री-हाउस लोनावाला के ट्रापिकल फारेस्ट के बिल्कुल बीचो-बीच है। यह जगह आप को प्रकृति के और करीब ले आती है। यहाँ आनें के बाद खूबसूरत नज़ारो को देख कर यहाँ से जाने का मन ही नहीं करेगा।

इस तरह की यात्रा व यायावरी हमें एक नयी ऊर्जा से सराबोर कर देती है। पर मन बार बार जंगल में बसे रंगमंच के उस अनोखे संसार की ओर वापस जानेको हो रहा है। ऐसी ढ़ेरों जगहें हैं जो हमें अपने पास बुलाकर युवा कर देती है और हम एक नयी ऊर्जा व जोश के साथ वापस अपनी जिंदगी में लौट आते हैं। कुछ यादगार, खूबसूरत व रोमांचित लम्हों के साथ •••••।

नीति सिंह प्रेरणा
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।