चिंतन सूत्र

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अगर पैरो में हो चोट
साथ में हो छोटी सोच।
तो इंसान जिंदगी में
आगे नहीं बड़ सकेगा।
इसलिए दोनों का इलाज
इंसान के लिए जरूरी है।
जो डाक्टर के इलाज से और
खुदके आत्ममंथन से ठीक होगा।।

इंसान की पहिचान काम से होती है
इसलिए कर्म करना जरूरी है।
महंगे कपड़े तो दूकान के
पुतले भी पहनकर रखते है।
जो सिर्फ शो के लिए होते है।
इसलिए अपने जीवन को
शो की चीज न बनाये।
और अपने कार्यो से ही
स्वंय की पहचान बनाये।।

कमाया गया धन को
परिग्रह समझकर।
कुछ दान धर्म और
परोपकार में लगाओगें।
तो आपके परिणामों को
शांति मिल जायेगी।

स्वंय के स्वाध्याय से
आपको आत्मबोध होगा।
आत्मबोध से समाधि मिलेगी।
इसलिए नियमित स्वाध्याय
और आराधना करो।
तो मोक्षमार्ग को प्राप्त करोगे।।

जो कार्य तपस्या से भी
जिंदगी में नहीं हो सकता।
वह भावना से हो जाता है।
इसलिए भावों को निर्मल बनाये।
और अच्छी भावनाएं अपनी
आत्मा के अंदर भाये।।

यदि उपरोक्त सूत्रों को अपनी
जिंदगी का हिस्सा बनाओगे।
तो एक दिन निश्चित ही
मोक्ष गति को पाओगे।
और आपका आने वाला
भव भी सुधार जायेगा।
और आपका मानव जन्म
भी सफल हो जायेगा।।

हिंदी दिवस के उपलक्ष्य पर मेरी रचना आप सभी के लिए समर्पित है।
आप सभी को हिंदी दिवस की शुभ कामनाएं और बधाई साथ ही आपसे अनुरोध है की हिंदी का प्रयोग करे और देश का नाम रोशन करे।

जय जिनेंद्र देव
संजय जैन (मुंबई)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।