दौलत

Read Time0Seconds
arun jain
ख़्वाबों की कश्तियों में
आओ कुछ और
सफर कर लें,
सारे जहां की दौलत
हम अपने
नाम कर लें।
दौलत वह नहीं,
जो तिजोरियों में
कैद है,
दौलत वह जो
खुशबू,फूल,हवाओं में
बिखरी है।
बदलियों के आंचल से
बारिशों में पसरी है,
जो फुनगियों से निकली,
सूरज की रोशनी में
महकी है।
जो दूर कोयल की
कूक में चहकी है,
जो बच्चों की हंसी से
हवाओं में लहरी है।
जो प्रकृति की
मुरकियों,तानों में
बहकी है,
जो तेरी-मेरी
सांसों में
बसती है।
जो हर हमेशा
हमारे दिल की
गहराइयों में
पैठी है,
हमारी सोच में
वाबस्ता हो,
चुपचाप बैठी है।
आओ इस दौलत को
बाहर निकालें,
मीठी यादों को
सबसे बांट लें..
थोड़ा दर्द
छाँट दें
दिलों को हल्का करें,
बोझ बांट लें।
लंबे सफर के लिए…
हमसफर के लिए॥

                                                                          #अरुण कुमार जैन

परिचय: सरकारी अधिकारी भी अच्छे रचनाकार होते हैं,यह बात 
अरुण कुमार जैन के लिए सही है।इंदौर में केन्द्रीय उत्पाद शुल्क विभाग में लम्बे समय से कार्यरत श्री जैन कई कवि सम्मेलन में काव्य पाठ कर चुके हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त सहायक आयुक्त श्री जैन का निवास इंदौर में ही है।

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

हिन्दी से ही मेरा भारत महान

Tue Aug 1 , 2017
ज्ञान मिला घनघोर मिला, बोलन लागे सब अंग्रेजी बोल.. अंग्रेजो की ‘अंगेजी’ के देखो पीछे पड़ गए भारत के सिर-मौर मातृ भाषा छोड़न लागे जब से … सुन लो इसके परिणाम , धीरे-धीरे विदेशी तर्ज पर जा रहा है, मेरा भारत महान। संस्कृति सभ्यता सब भूल रहे, नहीं किसी को […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।