उठो कलम के प्रखर साधकों, हिंदीमय भारत कर दो – डॉ अवध

1 0
Read Time2 Minute, 12 Second

होजोई।

असम हिंदी साहित्य सभा और सर्व हिंदुस्तानी परिषद कछाड़ ने संयुक्त रूप से 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाया। भव्य समारोह में कई गणमान्य कवियों के साथ मेघालय से आमन्त्रित सुविख्यात साहित्यकार डॉ अवधेश कुमार अवध को अंगवस्त्र के साथ प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

उत्तर प्रदेश के चन्दौली जिले के मूल निवासी डॉ अवध मेघालय की एक सीमेंट कम्पनी में कार्यरत हैं। तकनीकी सेवा के बावजूद बचपन से ही इनकी रुचि साहित्य में है। गद्य और काव्य की लगभग सभी विधाओं में सृजन करते हैं। साथ ही बेबाक पत्रकारिता भी इनका शौक है। इसलिए हिंदी साहित्य जगत में डॉ अवधेश कुमार अवध एक जाना पहचान नाम है। नवोदित हिंदी और हिंदीतर रचनाकारों को प्रोत्साहित कर हिंदी की मुख्य धारा में जोड़ने की साधना में भी लगे रहते हैं।

डॉ अवध के मुक्तक “उठो कलम के प्रखर साधकों, हिंदीमय भारत कर दो” ने खूब तालियाँ बटोरी। डॉ अवधेश कुमार अवध के सम्मानित होने पर हजारों लोगों ने बधाइयाँ दीं। हिंदी की बढ़ती लोकप्रियता और विस्तार हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की दिशा में आश्वस्त करती है। इस अवसर पर प्रफुल्ल कुमार मोहंतो, राजेन गोगोई, पद्मश्री डॉ जोयाश्री गोस्वामी, पूर्वकुलपति डॉ अमरेन्द्र चक्रवर्ती, मदन सिंघल, मनोज कुमार साह, पंकज पान्डे, भृगुनाथ सिंह और राज गुप्ता के साथ सभागार में सैकड़ों लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन राजीव गुप्ता ने किया।

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

सम्मान

Sun Sep 15 , 2019
जीते जी सम्मान करो अपने बड़ो से प्यार करो जो पसन्द हो वही खिलाओ जीवन उनका सुगम बनाओ एकाकी उन्हें न रहने दो खुशियों के हर पल जीने दो दुआएं निकलेगी उनके मुख से भाग्य चमकेगा तुम्हारा कसम से बच्चों की तरह बड़ो को संभालो अपने बचपन का कर्ज उतारो […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।