प्रार्थना पत्र 09

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सेवा में,
श्री नरेंद्र मोदी जी,
प्रधानमंत्री भारत सरकार,
नई दिल्ली।
दिनांक: 23 जनवरी 2020।
विषय: नागरिकता संशोधन कानून CAA के पक्ष में पदयात्रा की समय रहते तुरंत अनुमति हेतु आवेदन-पत्र।

आदरणीय महोदय,
आदरणीय माननीय सम्माननीय सशक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवं गृहमंत्री अमित शाह जी मैंने राष्ट्रहित में एसडीएम खौड़ जिला जम्मू अर्थात जम्मू-कश्मीर प्रदेश से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय दिल्ली तक की पदयात्रा हेतु दिनांक 03 जनवरी 2020 को आपसे तुरंत अनुमति मांगी थी।जिस पर आपके व गृह मंत्रालय के कार्यालयों के आदरणीय सचिवों ने तुरंत तीव्र कार्रवाई की थी।जिसकी गति बाद में धीमी हो गई थी। परंतु समस्त सचिवों व अधिकारियों ने मेरे राष्ट्रप्रेम एवं साहस की अत्यंत प्रशंशा की और ढेरों शुभकामनाएं देते हुए मेरी ऊपरोक्त प्रार्थनापत्र को अग्रसर किया।जिसका मैं हृदय तल से आभारी हूँ।
आदरणीय माननीय सम्माननीय सशक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवं गृहमंत्री अमित शाह जी गृह मंत्रालय की ओर से भेजी गई मेरी प्रार्थना-पत्र पत्रांक 13012/3/2019-Coord दिनांक 10 जनवरी 2020 पर राज्य सरकार के प्रधान सचिवों द्वारा कार्रवाई करते हुए पत्रांक पीएस/पीआरएस/ग्रीवांस/1811/20 दिनांक 22 जनवरी 2020 को जब अडिशनल ग्रीवांस सचिव डा. देसराज भगत जी के पास पहुंची, तो मैंने उनसे उनके कार्यालय के दूरभाष पर उक्त ग्रीवांस पर तुरंत कार्रवाई करने का विनम्र आग्रह किया। परंतु उक्त अधिकारी ने मेरी उक्त ग्रीवांस को ग्रीवांस ना मानते हुए मुझे ग्रीवांस का अर्थ समझाने में मेरा समय व्यर्थ में बर्बाद किया।जिस पर मैंने उनसे बहस ना करते हुए पुन: स्पष्ट पूछा कि महोदय देश के माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, गृहमंत्री अमित शाह जी एवं इस ग्रीवांस को ग्रीवांस मानते हुए आप तक पहुंचाने वाले भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी क्या पागल हैं? तब उन्होंने अन्य कार्यों में अपनी व्यस्तता का उल्लेख करते हुए तुरंत फोन काट दिया।जैसे वह सी.ए.ए. के कारण राष्ट्र में विपक्ष द्वारा की जा रही आगजनी हिंसा और उपद्रव को शांत करने में उलझी केंद्र सरकार एवं माननीय उच्चतम न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ से भी अधिक महत्वपूर्ण कार्य कर राष्ट्रहित में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हों।
सम्माननीय सशक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवं गृहमंत्री अमित शाह जी मेरी उल्लेखनीय पीड़ा यह है कि मैं उक्त कश्मीर प्रशासनिक सेवा अधिकारी माननीय डा. देसराज भगत जी को कैसे समझाता की प्रार्थी देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, गृह मंत्री अमित शाह जी, सहित संलिप्त समस्त भारतीय प्रशासनिक व पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों की मानसिक जांच कराने में सक्षम नहीं है।जो उक्त प्रार्थना-पत्र को ग्रीवांस मानते हैं।
सम्माननीय सशक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी एवं गृहमंत्री अमित शाह जी मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि ऐसे समस्त भारतीय वरिष्ठ अधिकारियों को समझाएं कि वरिष्ठ से वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी एवं भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी राष्ट्र के नागरिकों के स्वामी ना होकर मात्र सेवक हैं।जिस सेवा का वे सरकार से वेतन सहित अनेक सुविधाएं लेते हैं।इसलिए राष्ट्रहित में राष्ट्र की शान्ति विकास एवं समृद्धि के लिए मुझे सी.ए.ए. के पक्ष में पदयात्रा हेतु तुरंत अनुमति देकर कृतार्थ करें।
चूंकि मेरी पदयात्रा के मुख्य लक्ष्य यूँ हैं कि हम देश के विपक्षी दलों में उत्पन्न राष्ट्रविरोधी नाकारात्मक ऊर्जा को राष्ट्रहित की साकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित करें, सम्पूर्ण राष्ट्र के नागरिकों सहित आप व गृहमंत्री अमित शाह जी द्वारा चलाए जा रहे सदृड़ राष्ट्रनिर्माण कार्यों में कंधे से कंधा मिलाएं, कलंकित धारा 370 की समाप्ति एवं जम्मू-कश्मीर के नागरिकों हेतु अपनाई गई विकासशील नीतियों का आभार व्यक्त करें, पड़ोसी देशों से आए पीड़ित-प्रताड़ित हिंदुओं को सी.ए.ए. के अंतर्गत नागरिकता दिलाकर स्वच्छ, उन्नत व सशक्त राष्ट्रनिर्माण करें।जिसकी सुगंध से समस्त वीर क्रांतिकारी बलिदानियों की आत्मा को शाँति दिलाएं और उनके संजोए राष्ट्रीय सपनों को साकार करें।
मेरी प्रबल इच्छा यह भी है कि इस महायज्ञ में मुनव्वर राणा जैसे दिग्गज लेखक भी नाकारात्मक सोच को त्याग कर साकारात्मक सोच अपनाएं और देश से भ्रष्टाचार, आगजनी, आतंक व हिंसा को जड़ से समाप्त करने में राष्ट्र का सर्वोच्च कर्तव्य निभाएं। ताकि पड़ोसी देशों की सम्पूर्ण आतंकी शाजिशें विफल हों और हम अपने भयंकर कष्ट का निवारण आपकी छत्रछाया में राष्ट्रध्वज तिरंगे को विश्व में सबसे ऊंचा फहरा कर करें। सम्माननीयों
जय हिंद

प्रतिलिपि सेवा में:- (1) माननीय सांसद डा.जितेंद्र सिंह जी, शमशेर सिंह मन्हास जी एवं जुगल शर्मा सहित
(2) माननीय डीसी जम्मू और एसडीएम अखनूर व एसडीएम खौड़ एवं कई अन्यों को सूचना एवं शीघ्र उचित कार्यवाही हेतु अणुडाक अर्थात इमेल द्वारा सादर भेज दी हैं।सम्माननीयों जय हिंद

प्रार्थी
इन्दु भूषण बाली

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।