Advertisements
gopal narsan
बड़ा बनना है तो
संस्कारो से बनिए
बड़ा बनना है तो
विचारों से बनिए
बड़ा बनने के लिए
बड़ी सोच जरूरी है
आराम का सुख छोड़
संघर्ष करना जरूरी है
बड़ा वही है जगत में
जो झुकना जानता है
बड़ा वही है जो
दुसरो की नजर में
चढ़ना जानता है
बड़ा वही है जो
गैरो को अपना मानता है
बड़ा होकर भी
जो छोटा समझता है
सच मे वही बड़ा होता है।
#श्रीगोपाल नारसन
परिचय: गोपाल नारसन की जन्मतिथि-२८ मई १९६४ हैl आपका निवास जनपद हरिद्वार(उत्तराखंड राज्य) स्थित गणेशपुर रुड़की के गीतांजलि विहार में हैl आपने कला व विधि में स्नातक के साथ ही पत्रकारिता की शिक्षा भी ली है,तो डिप्लोमा,विद्या वाचस्पति मानद सहित विद्यासागर मानद भी हासिल है। वकालत आपका व्यवसाय है और राज्य उपभोक्ता आयोग से जुड़े हुए हैंl लेखन के चलते आपकी हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकें १२-नया विकास,चैक पोस्ट, मीडिया को फांसी दो,प्रवास और तिनका-तिनका संघर्ष आदि हैंl कुछ किताबें प्रकाशन की प्रक्रिया में हैंl सेवाकार्य में ख़ास तौर से उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए २५ वर्ष से उपभोक्ता जागरूकता अभियान जारी है,जिसके तहत विभिन्न शिक्षण संस्थाओं व विधिक सेवा प्राधिकरण के शिविरों में निःशुल्क रूप से उपभोक्ता कानून की जानकारी देते हैंl आपने चरित्र निर्माण शिविरों का वर्षों तक संचालन किया है तो,पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों व अंधविश्वास के विरूद्ध लेखन के साथ-साथ साक्षरता,शिक्षा व समग्र विकास का चिंतन लेखन भी जारी हैl राज्य स्तर पर मास्टर खिलाड़ी के रुप में पैदल चाल में २००३ में स्वर्ण पदक विजेता,दौड़ में कांस्य पदक तथा नेशनल मास्टर एथलीट चैम्पियनशिप सहित नेशनल स्वीमिंग चैम्पियनशिप में भी भागीदारी रही है। श्री नारसन को सम्मान के रूप में राष्ट्रीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा डॉ.आम्बेडकर नेशनल फैलोशिप,प्रेरक व्यक्तित्व सम्मान के साथ भी विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ भागलपुर(बिहार) द्वारा भारत गौरव
(Visited 7 times, 1 visits today)
Please follow and like us:
0
http://matrubhashaa.com/wp-content/uploads/2017/10/gopal-narsan.pnghttp://matrubhashaa.com/wp-content/uploads/2017/10/gopal-narsan-150x150.pngmatruadminUncategorizedकाव्यभाषाgopal,narsanबड़ा बनना है तो संस्कारो से बनिए बड़ा बनना है तो विचारों से बनिए बड़ा बनने के लिए बड़ी सोच जरूरी है आराम का सुख छोड़ संघर्ष करना जरूरी है बड़ा वही है जगत में जो झुकना जानता है बड़ा वही है जो दुसरो की नजर में चढ़ना जानता है बड़ा वही है जो गैरो को अपना मानता है बड़ा होकर भी जो छोटा समझता...Vaicharik mahakumbh
Custom Text