नारी…

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naveen jain

स्नेह की धारा है वह, है वात्सल्य की मूर्ति ,
वीरुध वही,वन वही, कालिका की वो पूर्ति |
राष्ट्र,समाज और परिवार को वो समर्पित,
स्व पर,हित को करती प्राण भी अर्पित |
वाणी वही,गिरिजा वही,है दामिनी भी वह,
कल्पना वो,प्रतिभा वही है,कामिनी भी वह|
किरण है वह,है सुभद्रा,है महादेवी भी वह,
सृजक है वो समाज की,समाजसेवी भी वह|
है मदर टेरेसा,ऐनी बेसेन्ट,यशोदा भी वह,
है अनैतिक समर में संघर्षरत,योद्धा भी वह|
बोझ नहीं है,अबला नहीं,न द्वितीय है वह,
वह धरा पर देवी रूप,नारी अद्वितीय वह|
जननी वही,गृहिणी वही,नंदिनी भी है वह,
भगिनी वही,सती वही,संगिनी भी है वह|
बरछी वही,कलम वही,तलवार भी है वह,
कंचन वही,चाँदी वही,अलंकार भी है वह|
शस्त्र भी वह,शास्त्र भी वह,शक्ति भी है वह,
अस्त्र है वह,आस्था भी वह,भक्ति भी है वह|

                                                             #नवीन कुमार जैन

 

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One thought on “नारी…

  1. शानदार।देखन में छोटो लगे घाव करे…

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।