मां कोटि कोटि तुझे प्रणाम

Read Time0Seconds

मां कोटि कोटि तुझे प्रणाम,
करते तुझे हम सुबह शाम।

मां सर पर रहे तेरा सदा साथ,
कभी न छूटे तेरा हमसे साथ।
तुम दुनिया की रखवाली हो,
बिगड़े काम बनाने वाली हो।
करे याद तुझे हम सुबह शाम।
मां कोटि कोटि तुझे है प्रणाम।।

मन में न आये कोई बुरा विचार,
करे हम सदा सबका उपकार।
ऐसी शक्ति मां हमको दीजिए,
दुरगनो को दूर हमसे कीजिए।
ऐसे विचार मन में करे विश्राम,
मां कोटि कोटि तुझे है प्रणाम।।

मां सबके आओ तुम द्वार,
उनको सम्पत्ति दे तूमअपार।
उनके कष्टों को तुम हरना
उनकी सब मदद तुम करना।
यह विनती करते सुबह शाम,
मां कोटि कोटि तुझे है प्रणाम।।

मां तेरे कोटि कोटि है रूप,
कहीं छाया है कहीं है धूप।
करती हों सिंह की सवारी,
कभी बन जाती खप्पर धारी।
कैसे करू तेरा रूप का बखान,
मां कोटि कोटि तुझे है प्रणाम।।

मां तेरे से एक अब अरदास,
इस कोरोना का करो विनाश।
सब सुख की बंशी बजावे,
बस तेरा ही नित्य गुण गावे।
यह मेरे नहीं सबके है अरमान,
मां कोटि कोटि तुझे है प्रणाम।।

मां तेरे ही नौ नए हैअवतार
हर कन्या में दिखते ये अवतार
इसलिए करते कन्या की पूजा
करते नहीं कोई काम हम दूजा
करते है सब तेरा ही हम ध्यान।
मां कोटि कोटि तुझे है प्रणाम।।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

0 0

matruadmin

Next Post

नारी सम्मान

Sun Oct 18 , 2020
आज तो हर संचार मीडिया पर मां ही तो छाई है, तो फिर वो वृद्ध आश्रम में किसकी मां आई है, आज नारी का शोषण करने वाले ही मां को मानने वाले है नारी को वासना की निगाहों से ताड़ने वाले वो औरत भी तो किसी की बहिन या माई […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।