चुनाव के समय नही कुंभ के समय आता है कोरोना नेताओं को नही श्रद्धालुओं को डराता है कोरोना कुंभ के लिए निगेटिव होना जरूरी है पोजेटिव को ही खाता है कोरोना दिन में कही घूमो नही मिलता कोरोना रात में कर्फ़्यू लगाया ताकि न आए कोरोना।#श्रीगोपाल नारसन Post Views: 6

‘सुन-ए-मगरूर तकब्बुर नहीं अच्छा होता क्योंकि हर वक्त मुकद्दर नहीं अच्छा होता’इस पंक्ति के रचनाकार है पंडित प्रेमचंद सन्ड ,जो रुड़की के पहले ज्ञात साहित्यकार माने जाते है।उनके बाद पंडित कीर्ति प्रसाद शुक्ल ने लिखा,’परेशानियां जो न होती जहां में ,किसी से खुदा की इबादत न होती’,रुड़की के केंद्रीय भवन […]

अब अहित सोचना बंद करो कुछ तो ऊपर वाले से डरो सबकी भलाई की बात करो अच्छे जज्बात अपने करो अच्छाई ही सबके साथ जाएगी बुराई किसी काम नही आएगी समय की कीमत को पहचानो सद्कर्म जीवन में अपना लो किसी को दे सको तो खुशी दो अपनत्व समान मजबूती […]

जो हमारे अपने थे वो हमसे दूर हो गए इस मुई महामारी से हम सब मजबूर हो गए कभी सोचा न था ऐसी घड़ी भी आएगी वो अस्पताल में रहेगे हम मिलने तक से मजबूर हो गए जिनके प्यार में हमने पलक पावड़े बिछाये सदा उन्हें देखने तक को हम […]

सबसे करिए प्रेम जगत में अपना हो या हो पराया सब ईश्वर की सन्तान है ईश्वर का हो सब पर साया पंचतत्व से बनाई सृष्टि दिया अनूठा उपहार सबको वही पालक है इस दुनियां के अजन्मा निराकार कहते उनको जीवन मरण से परे वे रहते तभी तो वे परमात्मा कहलाते […]

झूठे वायदों की चाशनी में पक रही है चुनाव की खीर वोटर राजा को लुभाने में नेताजी हो रहे धीर गम्भीर पांच साल तक जहां गए नही वही बहा रहे घड़ियाली आंसू कैसे मिले सत्ता की कुर्सी आइडिया सोच रहे कोई धांसू पर वोटर राजा समझ रहे है नेताजी के […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।