होली का त्योहार

0 0
Read Time1 Minute, 4 Second

krishn

होली का त्योहार निराला है है भैया।
हर एक रंग की शान निराली है भैया।।

1.
लाल रंग खतरे का सूचक, हरा रंग हरियाली का।
केसरिया है त्याग शौर्य का, श्वेत रंग खुशहाली का।।
आपसी भेदभाव भुलाकर, प्रेम करो तुम सब भैया..।।
…… होली का त्योहार

2.
होली के दिन होलिका को दहन कर दिया जाता है।
सब कुछ जल जाता है लेकिन, प्रहलाद भक्त बच जाता है।।
बुराई पर जीत का, यह त्यौहार है भैया।।
……..होली का त्योहार

3.
अगले दिन धुलंडी आती, बच्चे खुश हो जाते।
आपस में एक दूजे के वो, रंग-गुलाल लगाते।।
नहीं किसी को हानि होवे, इसका ध्यान रखो भैया।।
…….होली का त्योहार

*कवि कृष्ण कुमार सैनी”राज”

दौसा,राजस्थान 

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

जयपुर की रेनू शब्द मुखर को श्रेष्ठ कहानी के लिए किया पुरस्कृत 

Tue Mar 19 , 2019
जयपुर | जयपुर की  साहित्यिक एवं शैक्षणिक संस्था स्पंदन  और साहित्य समर्था की ओर से अखिल भारतीय डॉक्टर कुमुद कहानी प्रतियोगिता में जयपुर की संपर्क संस्थान की प्रदेश समन्वयक रेनू शब्द मुखर को श्रेष्ठ कहानी इस्तीफा के लिए पुरस्कृत किया गया।  जयपुर प्रेस क्लब स्थित मुख्य सभागार में आयोजित एक […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।