दिखता नहीं….

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singhai subhash
दिखता नहीं
भीड़ में कोई शत्रु
खाली हो पेट
विपत्ती आयी
घर बदले मित्र
सूखी अपेक्षा
भंवरें जुड़े
दलबल सहित
सन्नाटा चिरा
बिना उजाले
अंधियारा प्रबल
कायम आशा
गर्म शीतल
प्रकृति का स्वभाव
पवन कहे
चौखट गिरी
घर -घर की रीत
दीवार उंठी
लौटेगा वह
समझ आने पर
अपेक्षा इन्हें
#सिंघई सुभाष जैन

परिचय :

 नाम –          सिंघई सुभाष जैन
 जन्म तिथि   9 दिसम्बर 1956
जन्म स्थान – नरसिंहपुर के दूर – सुदूर गांव
                    बिलेहरा ( नादिया)
सम्प्रति –       बैंक ऑफ़ बड़ौदा से विशेष सहायक पद से सेवानिवृत 
उपलब्धि –    कादम्बिनी एवं स्वेदश द्वारा  कहानी के लिये 
                   दो दशक पूर्व पुरस्कृत
लेखन –        कहानी , लघुकथा , हाइकू एवं कवितायें ।
                  प्रमुख पत्र – पत्रिकाओं में रचना प्रकाशित  एव
                  आकाशवाणी से रचनायें प्रसारित
सम्पर्क।      इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।