पर्यावरण

Read Time0Seconds

aashutosh kumar
नीले गगन के तले
वृक्षों को पाकर
धरती का श्रृंगार बढ़े।

लहराती झोंके
बलखाती डाली
फूलों का खिलना
हवा का बहना
मानव का कल्याण करे
नीले गगन के तले
वृक्षों को पाकर
धरती का श्रृंगार बढ़े।

ऊँचे-वृक्ष और पहाडी
हर ओर हरियाली
नदी और नाले
प्रकृति को है प्यारे
जीवन का मार्ग प्रशस्त करे
नीले गगन के तले
वृक्षों को पाकर
धरती का श्रृंगार बढ़े।

धरती तो प्यारी
जगत दुलारी
हम सब की पालन हारी
नीले गगन के नीचे
हरी हरी हरियाली शोभा बढ़ाती
अपने आगोश में जीवन के
अंतिम दिनों में सुलाती
सबकी माता नाम से जानी जाती
ये तो हमेशा उपकार ही करे
नीले गगन के तले
वृक्षों को पाकर
धरती का श्रृंगार बढ़े।

जब तक है पौधे
तब-तक है सांसे
यह सबका कल्याण करे
कसी से न भेद-भाव करे
नीले गगन के तले
वृक्ष लगाकर बढें।।

“आशुतोष”

नाम।                   –  आशुतोष कुमार
साहित्यक उपनाम –  आशुतोष
जन्मतिथि             –  30/101973
वर्तमान पता          – 113/77बी  
                              शास्त्रीनगर 
                              पटना  23 बिहार                  
कार्यक्षेत्र               –  जाॅब
शिक्षा                   –  ऑनर्स अर्थशास्त्र
मोबाइलव्हाट्स एप – 9852842667
प्रकाशन                 – नगण्य
सम्मान।                – नगण्य
अन्य उलब्धि          – कभ्प्यूटर आपरेटर
                                टीवी टेक्नीशियन
लेखन का उद्द्श्य   – सामाजिक जागृति

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी के प्रबल समर्थक, भारतीय भाषा-प्रेमी और गांधीवादी विचारक न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर धर्माधिकारी का निधन

Sun Jan 6 , 2019
मुंबई | मुंबई उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति माननीय श्री चंद्रशेखर धर्माधिकारी जी का दो जनवरी को निधन हो गया। वे ijfcec/ bd/kdlfldb ks Ovr गांधीवादी चिंतन और राष्ट्रवादी विचारधारा के एक सशक्त हस्ताक्षर थे। वे राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी के प्रबल समर्थक और भारतीय भाषा-प्रेमी थे, जो […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।