शौचालय अपनाएं,स्वच्छ भारत बनाएं

1
2 0
Read Time2 Minute, 50 Second
atul sharma
स्वस्थ अगर रहना है तन से,
सुबह सुबह में योग करें।
मर्यादा में रहना है तो,
शौचालय का प्रयोग करें।।
ना जाने कितनी बीमारी,
खुले शौच से होती हैं।
और घर की बहू बेटियां,
अपनी इज्जत होती हैं।।
मूंछों का ख्याल रखो तुम,
महिलाओं का मान रखो।
बेटी घर की इज्जत होती,
इतना भी तो ध्यान रखो।।
खुले शौच से बढ़े बीमारी,
कितने संकट हमने झेले हैं।
पोलियो ग्रस्त, हुए अपंग,
नौनिहाल मौत पर खेले हैं।।
मल, पग में भरकर मक्खी,
जब भोजन तक जाती है।
उल्टी,हैजा सी बीमारी का,
उपहार हमें दे जाती है।।
बलात्कार सी ओछी हरकत,
खुले शौच से होती थीं।
अब जानो-मानो-पहचानो तुम,
पिछली सरकारें सोती थीं ।।
सरकार अगर चेती है इतना,
अनुदान आपको मिलता है।
बारह हजार की राशि में तो,
बढ़िया शौचालय बनता है।।
आओ,उठो और आंखें खोलो,
निर्मल, धरती-आकाश करें।
आओ कदम से कदम मिलाकर,
दुष्प्रथा  का नाश करें।।
हम जागे हैं तुम भी जागो,
फिर संपूर्ण राष्ट्र जगायेंगे।
शपथ उठाएं हम इसकी अब,
घर- घर शौचालय बनाएंगे।।
तकदीर बदलने को भारत की,
हम सब मिल सहयोग करें।
संस्कार में रहना है तो,
अब शौचालय  प्रयोग करें।।

#अतुल कुमार शर्मा

परिचय:अतुल कुमार शर्मा की जन्मतिथि-१४ सितम्बर १९८२ और जन्म स्थान-सम्भल(उत्तरप्रदेश)हैl आपका वर्तमान निवास सम्भल शहर के शिवाजी चौक में हैl आपने ३ विषयों में एम.ए.(अंग्रेजी,शिक्षाशास्त्र,समाजशास्त्र)किया हैl साथ ही बी.एड.,विशिष्ट बी.टी.सी. और आई.जी.डी.की शिक्षा भी ली हैl निजी शाला(भवानीपुर) में आप प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत हैंl सामाजिक क्षेत्र में एक संस्था में कोषाध्यक्ष हैं।आपको कविता लिखने का शौक हैl कई पत्रिकाओं में आपकी कविताओं को स्थान दिया गया है। एक समाचार-पत्र द्वारा आपको सम्मानित भी किया गया है। उपलब्धि यही है कि,मासिक पत्रिकाओं में निरंतर लेखन प्रकाशित होता रहता हैl आपके लेखन का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को उजागर करना हैl

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

One thought on “शौचालय अपनाएं,स्वच्छ भारत बनाएं

  1. समाज में फैली कुरीतियों पर लिखना, कवि का धर्म है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

'किंकर्तव्यविमूढ़'

Thu Dec 27 , 2018
सवाल बहुत है मन में जवाब कहाँ से लाऊं, नींद नहीं है आंखों में ख्वाब कहाँ से लाऊं, अशांति बहुत है जीवन में शांति कहाँ से लाऊं ? दर्द बहुत है दिल में दवा कहाँ से लाऊं, अपने कई हैं साथ में पर खास कहाँ से लाऊं, छल से भरी […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।