‘किंकर्तव्यविमूढ़’

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poonam
सवाल बहुत है मन में
जवाब कहाँ से लाऊं,
नींद नहीं है आंखों में
ख्वाब कहाँ से लाऊं,
अशांति बहुत है जीवन में
शांति कहाँ से लाऊं ?
दर्द बहुत है दिल में
दवा कहाँ से लाऊं,
अपने कई हैं साथ में
पर खास कहाँ से लाऊं,
छल से भरी इस दुनिया में
विश्वास कहाँ से लाऊं ?
कांटों भरी इन राहों में
आराम कहाँ से लाऊं,
समझ घिरी है जालों में
ज्ञान कहाँ से लाऊं,
समय निकले जब मंथन में
फिर वक्त कहाँ से लाऊं ?
ऐ जिंदगी,
तुझे समझना, है मुश्किल,
उलझन को जितना सुलझाऊं,
उतना ही खुद को उलझा पाऊँ,
फिर लगता ……
‘किंकर्तव्यविमूढ़-किंकर्तव्यविमूढ़’ ?
 #पूनम झा

परिचय: पूनम झा राजस्थान के कोटा से हैं l आप  ब्लॉग लिखती हैं और फेसबुक पर भी साहित्यिक समूहों में सक्रिय हैं l पुस्तकों,पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ,मुक्तक और लघुकथाएँ इत्यादि प्रकाशित होती रहती हैं l

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।