गले कैसे मिलें भैया

Read Time0Seconds

gopal

गले कैसे मिलें भैया,
जब पेट हो गए मोटे।

फोकट में दिल्ली लूटे,
जो सिक्के हैं खोटे।

सारे रिश्ते नाते हो गए,
आज के माहौल में छोटे।

अपराधी मौज कर रहे,
फरियादी खा रहे हैं सोटे।

रंग लगाने किसको जाएं,
लगाने से पहले हम सोचें।

नवरंगी हो हमारा हर पल,
ढूंढ रहे हम अक्सर मौके।

                                                                            #गोपाल कौशल

परिचय : गोपाल कौशल नागदा जिला धार (मध्यप्रदेश) में रहते हैं और रोज एक नई कविता लिखने की आदत बना रखी है।

 

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

ईश्वर सब कुछ है...

Mon Mar 20 , 2017
हम तो ईश्वर को मानते हैं, वही तो सब कुछ है.. हृदय में बसते हैं, दिल में रहते हैं.. दिल में ही बसते हैं, दिल की ही सुनते हैं.. दिल में ही कहते हैं, करना है उनको जो, एहसास कराते हैं। कोई मेरा बुरा करे, मुझको बताते हैं.. बुरा करने […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।