बचपन के दिन कितने है हसीन । मजा नहीं आएं दोस्तों के बिन ।। नीर में ढूंढे रेत खेलते ऐसे खेल । कभी मिट्टी आएं कभी आएं रेत ।। नीर में देख छवि भरें किलकारी । घर बनाने की कर रहें नन्हे तैयारी ।। गोपाल कौशल नागदा मध्यप्रदेश Post Views: […]

हिन्दी मेरा परिचय हैं हिन्दी मेरा शब्दालय हैं । मुझको रखती चैतन्य हिन्दी गंगा-हिमालय हैं । हिन्दी मेरा विद्यालय हैं हिन्दी मेरा पुस्तकालय हैं । पारस – मोती जैसे शब्द हिन्दी मेरा देवालय हैं ।। हिन्दी में हीं माँ सुना हैं हिन्दी बचपन का झूला हैं । जीवन का ऊर्जावान […]

नवाचारों में अग्रणी सुविचारों का धनी इरादों में हिमालय ह्रदय से प्रशांत विजय से विक्रांत राधाकृष्णन जैसा शांत होता है शिक्षक । युधिष्ठिर जैसा धर्मी भागीरथ जैसा कर्मी कर्ण जैसा दानवीर अर्जुन जैसा लक्ष्य चीर चाणक्य जैसा बुद्धिमान होता है शिक्षक । पत्थरों में शिल्पकार कच्ची मिट्टी का कुम्हार सूक्ष्मता […]

उत्तरायण होकर सूर्य पतंग संग करें मस्ती । तिल – गुमूंगफली बिना बेगानी संक्रांति ।। दूर करती खुशियों से मन में फैली जो भ्रांति । देती रिश्तों में मिठास मतभेद मिटाती संक्रांति ।। ऊंची उड़ान भरें सद्भाव प्रेम से रहना सिखलाती । पोंगल तो कही लोहडी रुप में मनातें हैं […]

सींचा जिसने नौनिहालों को अपने मेहनत के पसीने से । जिसे देख बच्चों का मन झूम उठता हैं सीखनें की खुशी से ।। बिन संसाधनों के कर दिए नायाब नवाचार हौसलों से । सुभाष यादव जैसा जज्बा जगाएं हम सच्चे जतन से ।। प्रायः शासकीय सेवारत शिक्षक साथियों के विचारों […]

बालसभा में बच्चों ने दी उम्दा प्रस्तुतियां,प्रतिभागी बच्चे हुए सम्मानित पढ़ें-लिखें,आगे-बढ़ें छू लें आसां ऐसे पंख लगा दो…. नागदा (धार ) – बचपन के दिन कितने हसीन.. कई सीख देते बचपन के दिन ..ऊंच-नीच हम ,कुछ न जाने..हम तो सबको अपना मानें जैसी काव्य पंक्तियों से बालसभा में फैजान शाह,माही […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।