तेरा ख्याल

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krushn koushik
तेरे ख्यालों के आबोदाने में अक्सर हमें सिमटना नहीं आता
हवाओं की साजिश को आखिर बता दिया हमे बिखरना नही आता
गुफ्तगू की नुमाइंदगी में ख़ामोश बैठा हूँ भोली चिड़िया सा
रेत की दर्दे दीवार हूँ बस जाकर कह दो फिसलना नहीं आता
हवाओं में लिपटा हुआ तिनका हूँ इस सितम ना छेड़ मुझे
परस्तिश के कलमें की इबादत हूँ बस मचलना नही आता।
अजीब सा मंजर सिमटा है  इस काफ़िर के आशियाने में
गर खाली भी ये घरौंदा, साये की आस में तड़पना नहीं आता।
सुना है ठिकाना तेरा उस शहर के बाज़ार की भीड़  में है
मनचला हूँ मैं भी तेरे गिरते आँचल का पर बिगड़ना नही आता।
#कृष्णकौशिक 
गाँव सरसौद जिला हिसार हरियाणा,इस वक्त केंद्रीय विद्यालय बोलांगीर न 1(उड़ीसा)में हिंदी शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ।
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।