चीखो मत

Read Time2Seconds

cropped-cropped-finaltry002-1.png

चीखों मत….
मत चीखो..!
अनसुना कर दिया जायेगा-
हर बेबस चीख को।

अनदेखा कर दिया जायेगा –
झरते आँसुओं को।

चुप रहो!
मचलता है शैतान,
चीख से।

बन जायेगा बाहुबली –
तुम्हारे आँसुओं में भींगकर।

ऊर्जावान बना देगा उन्हें –
तुम्हें निरीह, निरापद चिन्हित करने वाला
प्रत्येक लक्षण।

सुनो!
चीखो मत…
एक काम करो-
हुंकार भरो…. ।
आँखों में  आँसू नहीं
अंगारे लेकर।
प्रार्थना नहीं-
प्रयत्न भी नहीं, अब-
प्रतिरोध करो,

तुम्हारी या –
उनकी,
आखिरी साँस तक।

                                   #राजेन्द्र श्रीवास्तव
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

अकेला

Mon Mar 12 , 2018
यूँ रहना जहां में है दुश्कर  अकेले, न अर्थी उठे है न छप्पर अकेले। जो तन्हाइयों से मुहब्बत है कर ली, है लगता नही अब मुझे डर अकेले। समां गुफ्तगू का बनाते चलो जी, जो चलना हो लंबे सफ़र पर अकेले। हमें करके महनत है कल अपना लिखना, न कुछ कर […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।