योग बनाए निरोग….

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prerana

जीवन में जब बढ़ने लगे वियोग,
अनेक रोग जब कर रहे भोग..
जब शरीर को करना हो निरोग,
तो एक ही रास्ता है योग।
सांसों को जब लगाना हो आयाम,
तो करे मानुष थोड़ा प्राणायम..
आसन से आती सकारात्मकता,
ध्यान से दूर होती नकारात्मक्ता।

जब शरीर को करना हो निरोग,
तो एक ही रास्ता है योग।

अष्टांग योग से शुरू होती योगशाला की कक्षा,
यम नियम आसन प्राणायाम समाधि से रक्षा..
यम का पालन करके मन की होती शुद्धि,
नियम का पालन करके शरीर की शुद्धि।

सरल से कठिन की ओर जाना आसन में,
हर आसन के बाद आना है विश्राम में..
प्राणायाम से श्वांसों में आती लयबद्धता,
प्रत्याहार से इंद्रियों को साधक है साधता।

सरल सहज मन को बनाए अपनी धारणा,
तभी तो योगी में बनती ध्यान की प्रेरणा।

शरीर बने सरल,मिटे सब व्याधि,
योगी तब लगा सकता पूर्ण समाधि..
यही सम्पूर्ण शरीर और अष्टांग का है योग,
तो मानव से निश्चित दूर भागे वियोग॥

                                                 #प्रेरणा सेंद्रे इन्दौर

परिचय: में रहती हैं। आपकी शिक्षा एमएससी और बीएड(उ.प्र.) है। साथ ही योग का कोर्स(म.प्र.) भी किया है। आप शौकियाना लेखन करती हैं। लेखन के लिए भोपाल में सम्मानित हो चुकी हैं। वर्तमान में योग शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।