आम आदमी को आज तक भी नही मिली आजादी

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gopal narsan

15 अगस्त विशेष…………..

तीन सालों में तीन सौ से अधिक किसानो ने आत्म हत्याये की है जिनमें उत्तराखण्ड में आत्महत्या करने वाले किसान भी शामिल है। लेकिन किसान को खुशहाली की आजादी दिलाने के बजाए केन्द्र व राज्य की अधिकांश सरकारे सत्ता की कुर्सी बचाये रखने के लिए दलबदल की राजनीति को हवा देकर और प्रलोभन की राजनीति कराकर लोकतन्त्र के साथ ऐसा खिलवाड कर रही है। जो देश के लिए ही नही, समाज के लिए भी नासूर बनता जा रहा है। सबसे पहले उत्तराखण्ड से इसकी पहल उस समय हुई जब विधायको की खरीद फरोक्त करके कांग्रेस की हरीश रावत सरकार को जबरन बर्खास्त किया गया।न्यायालय के सहारे कुर्सी बचाने में कामयाब हुए हरीश रावत ईवीएम मशीनों के जरिये मात खा गए। यही स्थिति मणिपुर,गोवा ,बिहार समेत अनेक राज्यों में हूई जहां येनकेन प्रकारेण सत्ता हासिल करने के लिए केन्द्र के सत्तारूढ दल ने हर वह हथकण्डा अपनाया जो लोकतन्त्र को कुचलने वाला था। एक तरफ किसानो द्वारा की जा रही आत्महत्याये दूसरी ओर सत्ता की धिनौनी राजनीति ने देश के सामने लोकतन्त्र की सुरक्षा को लेकर ही सवाल खडे कर दिये है। गत वर्ष बुलन्दशहर जिले में अपनी नीजि कार में यात्रा कर रहे एक परिवार को सडक से अगवाकर बन्धक बनाकर बदमाशों ने परिजनों के सामने ही मां बेटी के साथ सामुहिक बलात्कार किया और अन्य परिजनों के हाथ पैर बांधकर बुरी तरह पिटाई की। लेकिन बार बार फोन करने पर भी आमजन की रक्षा का दम्भ भरने वाली पुलिस तत्काल मौके पर नही पहुंची।ऐसी ही एक धटना उ0प्र0 की राजधानी लखनउ में हुई तो कश्मीर में तिरंगा जलाने और पाकिस्तानी झण्डा फैहराने की धटनाये देश की आजादी को मुहं चिढा रही है। देश के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जो कभी एक के बदले दस सिर काटकर लाने की चुनौती अपनी चुनावी जनसभाओं में दे रहे थे वे प्रधानमन्त्री के कुर्सी पर बैठने के बाद ऐसा कुछ नही कर पाये जिसपर गर्व किया जा सके। अलबत्ता चीन व पाकिस्तान जैसे पडोसी देश जहां हमे आंखे दिखा रहे है वही वर्षो तक मित्र रहा नेपाल आज हमसे नाराज हुआ बैठा है। जिसका असर सीमाओं पर देखने को मिलता है।ऐसे में आम जन की आजादी पर भी प्रश्नचिन्ह लगने लगे है।क्योकि कोई भी व्यक्ति स्वयं को न तो सुरक्षित महसूस कर रहा है और न ही उसे अपनी आजादी का ऐहसास हो पा रहा है।
आम आदमी उस आजादी को आज भी ढूंढ ही रहा है। जिसके लिए अमर शहीद भगत सिंह,अशफाक उल्ला खां,राजगुरू, सुखदेव ,चन्द्रशेखर आजाद,मगंल पांडे,लक्ष्मी बाई,झलकारी बाई ,हरिद्वार में शहीद हुए 17 वर्षीय जगदीश प्रसाद वत्स जैसे वीरो ने अपने प्र्र्र्र्र्र्र्राणों की आहूति दी थी। देश और तिरंगे के लिए लड मरे आजादी के इन सिपाहियों को याद करने की फुर्सत अब किसी को नही है। स्वतन्त्रता दिवस व गणतन्त्र दिवस को छोडकर राष्टृभक्तों के बारे में चर्चा करने का समय भी किसी के पास नही है। जिन शहीदो की वजह से आज हम कहने को आजाद है,उन्हे सम्मान देने की जब बारी आती है तो हम चुप्पी साध जाते है। जो स्वतन्त्रता सेनानी जीवित बचे है उन्हे अफसोस होता है आज की आजादी को देखकर। एक ऐसी आजादी जो अराजक तत्वों को मिली हुई है। एक ऐसी आजादी जो माफियाओं को मिली हुई है। एक ऐसी आजादी जो देश के गददारों,भ्रष्टाचारियों,आतंकवादियों,अलगाववादियों,फिरकापरस्तियों,साम्प्रदायिको को मिली हुई है। चाहे देश में लागू कानून की खामी हो या राजनीति का अपराधीकरण व व्यवसायिकरण,इन्ही सबके के कारण देश बद से बदतर हालात से जुझ रहा है।
बढती जनसंख्या,जाति के नाम पर बटता समाज और बेरोजगारी के नाम पर अपराधिक गलियारों में भटकते युवाओं के कारण भारत आगे बढने के बजाए पीछे जा रहा है। लेकिन इसकी चिन्ता किसी को नही है। देश के आम लोगो ने सोचा था कि अंग्रेजो के चगुंल से मुक्त होने पर देश के आम लोग आजादी की खुली सांस ले सकेगें।देश को लूटने वाला कोई नही होगा और देश में दूध दही की नदिया बहेगी। क्या देश के आम और भले लोगो की यह सोच कारगर हो पाई!इसका जवाब है , बिलकुल भी नही,न देश में लूटने वालों की कमी है और न ही दूध दही की नदियां बहे, ऐसी स्थिती बन पाई है। दरअसल आजादी मिलने के साथ ही हम होश के साथ जोश खो बैठे थे। अंग्रेजो से सोगात में मिली अंग्रेजियत आज तक भी हम नही छोड पाए है।
भले लोगो से सरेआम धूस ली जा रही है। विधुत कनेक्शन के लिए धूस देने से लेकर न्याय पाने के लिए धूसखोरी के दल दल से गुजरने की पीडा हर आम आदमी के चेहरे पर देखी जा सकती है। सुबह धर से निकलने पर धर का मुखिया शाम को सकुशल धर लौट आएगा। इसकी उम्मीद नही की जा सकती। इसी तरह धर से बाहर निकलने पर किसी भी बहु बेटी की इज्जत सुरक्षित नही है। धर से बाहर निकलते ही महिलाओं से चेन स्केनिगं की धटनाए आम हो गई है। स्कूल जा रही छात्रा को कब गुण्डे उठा ले जाए ,कब कोई किसे गोली मार दे ,कहा नही जा सकता । सच यही है कि आज गुण्डे,हत्यारे,डाकू,चोर,ठग,माफिया,जेब कतरे तो आजाद है परन्तु आम आदमी को कदम कदम पर गुलामियत झेलनी पडती है। आजादी के इन 65 वर्षो में देश ने भौतिक तरक्की तो बहुत की परन्तु चरित्र निर्माण न होने से देश भ्रष्टाचार,अनाचार,अत्याचार के दल दल में फंसता चला गया। जिसकी बदौलत देश में एक तरफ भ्रष्ट नेता और नौकरशाह रातो रात गरीब से अमीर बनते चले गए और देश लगातार धाटे का शिकार होता चला गया। आज सब जानते है कि एक बार किसी एक गांव का मामूली प्रधान बनते ही एक साल के अन्दर प्रधान के धर की हालत बदल जाती है। जिला पंचायत सदस्य बनते ही उनकी वोट लाखों में बिकती है। इसी तरह जिन लोगो को जेलो में होना चाहिए वे विधान सभा से लेकर संसद तक में जा बैठते है। चुनाव आयोग ने भले ही विधान सभा के चुनाव के लिए चुनाव खर्च के रूप में 20 लाख रूपये की अधिकतम सीमा निर्धारित की हो परन्तु राजनेता बडी पार्टियों से टिकट पाने के लिए ही करोडों रूपयें खर्च करते है और फिर चुनाव जीतने के लिए अलग से करोडों रूपये खर्च किये जाते है। इतना खर्च करने के बाद वे ईमानदारी से जनता की सेवा करेगें यह उम्मीद उनसे कैसे की जा सकती है।
एक बार विधायक या संसद बनते ही नेता कगांलपति से करोड पति बन जाता है। अब मायावती,मुलायम जैसे नेताओं को ही देखिए जो राजनीति के बलबूते मामूली आदमी से खास आदमी बनने के साथ साथ अरबपति बन गए। वे अरब पति कैसे बने ,उनके पास इतना धन कहा से और कैसे आया ,यह हिम्मत आयकर विभाग की भी नही है। आज तक देश में किसी भी बडे नेता को आय से अधिक सम्पत्ति के आरोप में सजा नही हो पाई और न ही किसी नेता से उनकी गलत रास्ते से अर्जित सम्पत्ति जब्त ही हो पाई है। जिससे लगता है कानून सिर्फ और सिर्फ गरीबो,लाचारो,असहायो के लिए है। फिर भी न्यायालयों की फटकार औरउसके कडे तेवर के चलते कुछ दबंगो और बलशाली नेताओं नौकरशाहो का असली चेहरा उजागर हुआ है। अच्छा यही है कि हम एक बार फिर उस आजादी की लडाई के लिए उठ खडे हो और सत्ता का लालच छोडकर देश के अन्नदाता किसान की जान बचाने व उसे खुशहाल बनाने की पहल करे,साथ ही चुनाव के समय किये गए वायदों को चुनावी जुमलेबाजी न बताकर गम्भीरता के साथ उन वायदों को पूरा करने का काम करे। तभी स्वतन्त्रता का वास्तविक मायने साकार हो सकते है।

#गोपाल नारसन

परिचय: गोपाल नारसन की जन्मतिथि-२८ मई १९६४ हैl आपका निवास जनपद हरिद्वार(उत्तराखंड राज्य) स्थित गणेशपुर रुड़की के गीतांजलि विहार में हैl आपने कला व विधि में स्नातक के साथ ही पत्रकारिता की शिक्षा भी ली है,तो डिप्लोमा,विद्या वाचस्पति मानद सहित विद्यासागर मानद भी हासिल है। वकालत आपका व्यवसाय है और राज्य उपभोक्ता आयोग से जुड़े हुए हैंl लेखन के चलते आपकी हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकें १२-नया विकास,चैक पोस्ट, मीडिया को फांसी दो,प्रवास और तिनका-तिनका संघर्ष आदि हैंl कुछ किताबें प्रकाशन की प्रक्रिया में हैंl सेवाकार्य में ख़ास तौर से उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए २५ वर्ष से उपभोक्ता जागरूकता अभियान जारी है,जिसके तहत विभिन्न शिक्षण संस्थाओं व विधिक सेवा प्राधिकरण के शिविरों में निःशुल्क रूप से उपभोक्ता कानून की जानकारी देते हैंl आपने चरित्र निर्माण शिविरों का वर्षों तक संचालन किया है तो,पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों व अंधविश्वास के विरूद्ध लेखन के साथ-साथ साक्षरता,शिक्षा व समग्र विकास का चिंतन लेखन भी जारी हैl राज्य स्तर पर मास्टर खिलाड़ी के रुप में पैदल चाल में २००३ में स्वर्ण पदक विजेता,दौड़ में कांस्य पदक तथा नेशनल मास्टर एथलीट चैम्पियनशिप सहित नेशनल स्वीमिंग चैम्पियनशिप में भी भागीदारी रही है। श्री नारसन को सम्मान के रूप में राष्ट्रीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा डॉ.आम्बेडकर नेशनल फैलोशिप,प्रेरक व्यक्तित्व सम्मान के साथ भी विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ भागलपुर(बिहार) द्वारा `भारत गौरव` सम्मान,पंचवटी हिन्दी साहित्य सेवा सम्मान और मानस श्री सम्मान आदि भी दिया गया हैl 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।