दिखावा किस के लिए ?

Read Time6Seconds
sanjay
एक बार फिर में आपके सामने एक ऐसा विषय लेकर आया हूँ जिस पर आज की युवा पीड़ी बहुत ही तेजी से इस ज़माने में भाग रही है / क्या ये सब उनके लिए उचित है ? इस चमकती दमकती दुनिया को वो लोग भी उसी चश्मे से देख रहे है जिस हिसाब से उन्हें ये सब दिखाया जा रहा है /  वो उसे ही अपने जीवन में उतार रहे है / जब की ये सब वास्तविता से कोषों दूर है , और सिर्फ दिखावा है और कुछ नहीं / इसी के चक्कर में पड़कर न जाने कितने सारे युवा अपना जीवन बर्वाद कर रहे है और …..जब तक उनको समझ में आता है तब वो कही के भी नहीं रहते / क्या पहले के लोगो को ये सब नहीं पता था की ….? इस २१वी सदी में आगे क्या कुछ होने वाला है किसी को पता है क्या / इंसान को इस जीवन यापन करने को क्या चाहिए / जिस चीज की जरूरत हो उसे अपनी आमदनी के हिसाब से ही लेना चाहिए या फिर दुसरो के दिखावे के लिए लेना चाहिए / जब की उन दोनों ही चीजों का मकसद एक ही होता है / एक छोटा सा किस्सा आप लोगो को बताता हूँ शायद हम और आप समझ जाएँ / जैसे जैसे  मेरी उम्र में वृद्धि होती गई, मुझे समझ आती गई कि अगर मैं Rs.3000 की घड़ी पहनू या Rs.30000 की दोनों समय एक जैसा ही बताएंगी.!
मेरे पास Rs.3000 का बैग हो या Rs.30000 का इसके अंदर के सामान मे कोई परिवर्तन नहीं होंगा। !
मैं 300 गज के मकान में रहूं या 3000 गज के मकान में, तन्हाई का एहसास एक जैसा ही होगा।!
आख़ीर मे मुझे यह भी पता चला कि यदि मैं बिजनेस क्लास में यात्रा करू या इक्नामी क्लास, मे अपनी मंजिल पर उसी नियत समय पर ही पहुँचूँगा।!
इस लिए _ अपने बच्चों को अमीर होने के लिए प्रोत्साहित मत करो बल्कि उन्हें यह सिखाओ कि वे खुश कैसे रह सकते हैं और जब बड़े हों, तो चीजों के महत्व को देखें उसकी कीमत को नहीं _ …. .. और न ही किसी को दिखावे के लिए ये सब करो / हमें अपने आप को देखना है न की दुनिया वालो को कुछ दिखाना है क्योकि जो भी होगा हमें ही भोगना पड़ेगा दुनियां वालो को नहीं फिर क्यों दिखावा और किस लिए /
फ्रांस के एक वाणिज्य मंत्री का कहना था ब्रांडेड चीजें व्यापारिक दुनिया का सबसे बड़ा झूठ हैं जिनका असल उद्देश्य तो अमीरों से पैसा निकालना होता है लेकिन गरीब इससे बहुत ज्यादा प्रभावित होते हैं। क्योकि अमीर लोग तो पैसे को पकड़ते है , जबकि वो लोग यदि आप देखोगे तो सस्ते और सुन्दर वस्तुओ का इस्तेमाल करते है परन्तु माध्यम वर्गीय लोगो को कुछ और ही समझ आता है और फिर क्या होता है वो बताने की हमें जरूरत नहीं है /
क्या यह आवश्यक है कि मैं Iphone लेकर चलूं फिरू ताकि लोग मुझे बुद्धिमान और समझदार मानें?
क्या यह आवश्यक है कि मैं रोजाना Mac या Kfc में खाऊँ ताकि लोग यह न समझें कि मैं कंजूस हूँ?
क्या यह आवश्यक है कि मैं प्रतिदिन दोस्तों के साथ उठक बैठक Downtown Cafe पर जाकर लगाया करूँ ताकि लोग यह समझें कि मैं एक रईस परिवार से हूँ?
क्या यह आवश्यक है कि मैं Gucci, Lacoste, Adidas या Nike के पहनूं ताकि जेंटलमैन कहलाया जाऊँ?
क्या यह आवश्यक है कि मैं अपनी हर बात में दो चार अंग्रेजी शब्द शामिल करूँ ताकि सभ्य कहलाऊं?
क्या यह आवश्यक है कि मैं Adele या Rihanna को सुनूँ ताकि साबित कर सकूँ कि मैं विकसित हो चुका हूँ?
_नहीं यार !!!
मेरे कपड़े तो आम दुकानों से खरीदे हुए होते हैं,
दोस्तों के साथ किसी ढाबे पर भी बैठ जाता हूँ,
भुख लगे तो किसी ठेले से  ले कर खाने मे भी कोई अपमान नहीं समझता,
अपनी सीधी सादी भाषा मे बोलता हूँ। चाहूँ तो वह सब कर सकता हूँ जो ऊपर लिखा है
_लेकिन ….
मैंने ऐसे लोग भी देखे हैं जो मेरी Addidas से खरीदी गई एक की कीमत जूतों की जोड़ी में पूरे सप्ताह भर का राशन ले सकते हैं।
मैंने ऐसे परिवार भी देखे हैं जो मेरे एक Mac बर्गर की कीमत में सारे घर का खाना बना सकते हैं।
बस मैंने यहाँ यह रहस्य पाया है कि पैसा ही सब कुछ नहीं है जो लोग किसी की बाहरी हालत से उसकी कीमत लगाते हैं वह तुरंत अपना इलाज करवाएं।
मानव मूल की असली कीमत उसकी _नैतिकता, व्यवहार, मेलजोल का तरीका, सुल्ह-रहमी, सहानुभूति और भाईचारा है_। ना कि उसकी मोजुदा शक्ल और सूरत. !!!
सूर्यास्त के समय एक बार सूर्य ने सबसे पूछा, मेरी अनुपस्थिति मे मेरी जगह कौन कार्य करेगा?
समस्त विश्व मे सन्नाटा छा गया। किसी के पास कोई उत्तर नहीं था। तभी  कोने से एक आवाज आई।
दीपक ने कहा “मै हूं  ना”मै अपना पूरा  प्रयास  करुंगा ।
आपकी सोच  में ताकत और चमक होनी चाहिए। छोटा -बड़ा होने से फर्क  नहीं पड़ता, सोच  बड़ी  होनी चाहिए। मन के भीतर  एक दीप जलाएं और सदा मुस्कुराते रहें और इस चमकdamak की दुनिया को अपनी अंतरात्मा की आवाज़ से देखो तभी तुम्हे इस मानव जीवन का सही मूल्य मालूम पड़ेगा  और अपने आप को सही तरीके से समझ पाओगे / फिर सोचोगे की मैंने ये दिखावा किसी के लिए किया। और इससे हमें और हमारे परिवार को क्या मिला / इसलिए अपने आप को कभी भी किसी और से मत तुलना करो / आप जैसे हो जो भी हो श्रेष्ठ हो /

#संजय जैन

परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों  पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से  कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें  सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की  शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

मुलायम के बाद अमरसिंह ने ‘जीवन’ मोदी को समर्पित किया

Tue Jul 31 , 2018
सिर्फ भाजपा के जन्मांक 6 अप्रैल 1980 से शुरू करें तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की राजनीतिक भक्ति-धारा में पिछले 38 सालों में सबसे ज्यादा राज-भक्त ही जुड़े हैं। मोदी की भक्ति धारा के नए नक्षत्रों में अब समाजवादी नेता अमरसिंह भी शरीक हो गए हैं। प्रधानमंत्री के भक्त-शिरोमणियों का राजनीतिक […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।