एहसास…

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malamahendrasingh

‘एहसास’ की सातों नायिकाएं आज बहुत खुश थी। सभी के सुझावों से उनके जीवन में उमंग,उत्साह,उल्लास और ऊर्जा का नया रंग आया है, तो आइए जानते हैं बदलाव के चमकते रंगों को..
पहली नायिका ‘सुनिधि’ ने अब तय किया है कि, वो घर-परिवार के साथ-साथ अपनी खुशियों का भी ख्याल रखेगी। इसकी शुरुआत उसने अपने लिए अपनी पसंदीदा कॉटन की साड़ी गिफ्ट करके की है।
दूसरी नायिका ‘मुग्धा’ ने अब तय किया है कि, दैनंदिन कामकाज से समय मिलने पर अपने पतिदेव के साथ भी समय व्यतीत करेगी और उनकी भावनाओं का सम्मान करेगी। इसकी शुरुआत उसने अपने पतिदेव के लिए उनकी पसन्दीदा जगह डिनर की योजना बनाकर कर दी है।
तीसरी नायिका ‘निकिता’ ने अब तय किया है कि,अपनी उम्र को अपने हुनर के बीच कभी दिवार नहीं बनने देगी। इसकी शुरुआत उसने एक संगीत अकादमी का प्रवेश फार्म भरकर की है।
चौथी नायिका ‘भूमि’ ने अब तय किया है कि, अपने बच्चे के लालन-पालन के साथ ही नौकरी भी करेगी। किसी के कुछ भी कह देने से अपने व्यक्तिगत निर्णय प्रभावित नही होने देगी। इसकी शुरुआत उसने लिखे हुए इस्तीफे को फाड़कर कर दी है।
पांचवी नायिका ‘गीतिका’ ने अब तय किया है कि, बिना पैर पीछे किए वो रिश्तों को समझने का प्रयास करेगी। इसकी शुरुआत उसने अपनी सासू माँ को अपनी ‘सहेली माँ’ बनाकर कर दी है।
छठी नायिका ‘विजेता’ ने अब तय किया है कि, अपने करियर को प्राथमिकता देकर अपने भविष्य की योजना बनाएगी। इसकी शुरुआत उसने थोपे जाने वाले रिश्ते के लिए न कहकर, कर दी है।
सातवीं नायिका ‘चंचला’ ने अब तय किया है कि, वो अपनी माँ के साथ बीते हुए समय का भी प्यार बांटेगी। इसकी शुरुआत उसने,उन्हें कुछ दिन अपने घर में सस्नेह रहने के लिए आग्रह करके कर दी है।

तो ये हैं हमारी सात नायिकाएं,जिनके जीवन में आप सभी के प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सहयोग से सकारात्मक परिवर्तन आया है। आप सभी से आग्रह, केवल इतना की जीवन में एक बात को सदैव साथ लेकर चलें कि, ‘समस्या है तो समाधान होगा ही’, बस इसी में सफल जीवन का सार है। आइए, हम भी अपने जीवन में नई ऊर्जा और उमंग के रंगों के साथ कदमताल करें..

                                                    #श्रीमती माला महेंद्र सिंह

परिचय: श्रीमती माला महेंद्र सिंह, (एम एस सी, एम बी ए, बी जे एम सी)विगत एक दशक से अधिक समय से महिला सशक्तिकरण हेतु कार्यरत। जय विज्ञान पुरस्कार, स्व आशाराम भाटी छात्रवृत्ति, तेजस्विनी पुरूस्कार, गौरव सम्मान, ओजस्विनी पुरुस्कार, युवा पुरस्कार जैसे कई सम्मान प्राप्त कर चुकी है।  देवी अहिल्या विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय युवा उत्सव व विभिन्न राष्ट्रीय वक्त्रत्व कौशल प्रतियोगिताओ में किया। एन सी सी सिनीयर अंडर ऑफिसर रहते हुए, सामाजिक क्षेत्र में सराहनीय कार्य हेतु सम्मानित की गई। सक्रीय छात्र राजनीती के माध्यम से विद्यार्थि हित के अनेक आंदोलनों का नेतृत्व किया। अभ्यसमण्डल, अहिल्याउत्सव समिति जैसी कई संस्थाओ की सक्रिय सदस्य है। समय समय पर समसामयिक विषयो पर आपके आलेख पढ़े जा सकते है।

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।