आँसू

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krishn

बच्चे का रुदन
उसके आगमन से
होता शुरु।
हर दर्द के साथी
आँसू।
व्यस्क होने पर
छुप कर रो लेता।
माता पिता से भी
नहीं कुछ कहता।
कभी प्रेम में
ठुकराए कोई।
रो कर वह दर्द
पी लेता है।
नौकरी न मिले तो
बेरोजगारी होने
का दंड रोकर
भोग लेता है।
कोई क्या जाने
उसकी पीडा।
बस लेखनी से
कह देता है।
पन्ने पर आँसू गिरते
शब्द बनते बिगडते हैं।
कुछ भी कहो आँसू
ही अपने होते हैं।
आती प्रिय की याद नैन से,
झर-झर बहते हैं आँसू,
पलकें जातीं भीग याद में अपनों की,
कट जाती है रात गोद में सपनों की
जन्म से लेकर मृत्यु तलक
दुख सहते रहते हैं आँसू
हर शिशु पैदा होते ही है रोता
बालकपन में जिद कर नैन भिगोता
बेकारी में भागदौड़ से,
परेशान हो भरी जवानी नित दुख ढोता
छोड़ अकेला जाए कोई,
तब निर्झर से झरते आँसू

#कृष्ण कुमार सैनी”राज”,
दौसा,राजस्थान 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।