बरसाती

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asha jakad
बरसात  में
रिमझिम फुहार
लाए बहार

मेघा गरजे
भयंकर  बरसे
सर्वत्र  पानी

बारिश  हुई
सूरज छिप गया
अंधेराहुआ

पानी  बरसा
नव जीवन आया
जग हरषा

भरेगी नाली
चले कागज-नाव
बजेगी  ताली

वर्षा होने से
धरती  खिल उठी
मन हरषे

बरखा  आई
खुशियाँ  संग लाई
जीवन दायी

बदरा घिरे
झमाझम  पानी में
छाते निकले

बारिश हुई
पेड़-पौधे जी उठे
नदियाँ  बहे

घटाएँ  घिरी
बदरा बरसते
मन खिलते

इन्द्रधनुष
मन को  दे सुकून
मिटे कलुष

आसमान  में
बिजली   चमकती
औ कड़कती

वर्षा को देख
बच्चे  हो रहे खुश
होगा  रेनी डे

सर्वत्र पानी
नहीं  पीने का  पानी
प्यासा  जग

मस्ती के रंग
बारिश  झूमे अंग
खुशी  के  संग

#आशा जाकड़

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।