उम्मीदों का वृक्ष

Read Time0Seconds

उम्मीदों की चादर में कई सपने दफ्न हो गए।
जिन वृक्षो से की थी छाया की उम्मीदे,वो छाया
पतझड़ आने पर खुद ही कहीं गायब हो गयी।।

जीवन के गुजरते पलो में अक्सर ऐसा हुआ।
शुखे मुरझाये वृक्षो से भी कई बार ठंडी हवाओं
का अनुभव हुआ , शायद गिर रहे थे जो पत्ते
उन्होंने कहीं अंदर तक अंतर्मन को कहीं छुआ।।

उम्मीदों की हरियाली को फिर जीवन मे लाना होगा।
भविष्य के वृक्ष के लिए एक पौधा लगाना होगा।।
जीवन ना जाने कब,कहाँ कैसे विश्राम लेने लगेगा।
कभी ना कभी तुझे किसी की छाया में सोना होगा।
बस उसी छाया के लिए कर्मरूपी वृक्ष लगाना होगा।।

#नीरज त्यागी
ग़ाज़ियाबाद ( उत्तर प्रदेश )

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

पाँलीथिन

Thu Oct 10 , 2019
पाँलीथिन यहाँ होता, बया के घोंसले बसते। गई चीलें कहाँ बोलो, यहाँ थे गिद्ध जो रहते। मिटाता वंश पालीथिन, गये पशु जान से मारे। धरा ज्यों ढँक रही मानो, करो भी मुक्त अब कहते। . 🌍🌍🌍 कहे सरकार अब ऐसे, बचाओ आज धरती को। दिखे अब से न पाँलीथिन, बनालो […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।