इत्तेफ़ाक़ नहीं है ,था तुम्हारा इस कदर मेरे जीवन में आना ना जाने नियति ने कितने कितने गुढ से रहस्यों से तुमको हमसे मिलाने के जत्न किए होंगे हमारे तुम्हारे मन के मनोभावों को कितना पढ़ कर आत्ममंथन किया होगा हमारे रचियेताऔ ने ब्रह्मांड में विद्यमान किंतु अलग-अलग भटक रही […]
