एक युग पूरा हुआ इक युगपुरुष के जाने से , वो था अटल चट्टान सा पिछले कई जमाने से। रह राजनीति से लगा पर कृष्ण सा निर्लिप्त था, बेदाग था इस देश के दागिल रहे तराने से। ना हिंदु मुस्लिम सिख इसाई की जिसे दरकार थी , सब एक थे […]

इससे पहले कोई दुश्मन ,मां की छाती तक बढ जाये फिर कोई बन्दा बैरागी पर, पागल हाथी चढ जाये फिर कोई चौहान चूक जाये ,मूल्यों के फेरो में और दहाडते रह जाये ,हम कागज के शेरो में तब डर लगता है मुझको उस गौरी की गद्दारी का आस्तीन में छिपकर […]

हम शब्दों की दीपशिखा हैं हम भावों की जलती मशाल हम वीणापाणी के वरद पुत्र हम चेतनता की लपट ज्वाल हमने अपने शब्दों से सदा साहस को परिभाषा दी है टूटे दिल को ढ़ाढस  देकर जीने की नव आशा दी है धरती को माता मान सदा हमने  कीर्ति का गान  […]

हम शब्दों की दीपशिखा हैं हम भावों की जलती मशाल हम वीणापाणी के वरद पुत्र हम चेतनता की लपट ज्वाल हमने अपने शब्दों से सदा साहस को परिभाषा दी है टूटे दिल को ढ़ाढस  देकर जीने की नव आशा दी है धरती को माता मान सदा हमने  कीर्ति का गान  […]

मुझे मत मिटाओ, मैं तुम्हारी कोख की नन्हीं कली हूं। उत्थान को तुम देखती, करके खुद का ही पतन कैसे रहती थाती तुम्हारी, गर नानी करती यही जतन जो जीवन मिला है तुमको, वो भी किसी का दान था सोचो जरा तुम सोचकर, किसे मारने चली हूं। ठानी है मारने […]

देखो प्यारों,तुम सुन लो मेरे यारों,                 हम गीत शहीदों के गाएंगे। जिनकी कुर्बानी ने आजादी दी है,               हम गीत उन्हीं के गुनगुनाएंगे॥ जन्मते रहें सदा ही इस देश में,            वीर […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।