देखो प्यारों,तुम सुन लो मेरे यारों,
हम गीत शहीदों के गाएंगे।
जिनकी कुर्बानी ने आजादी दी है,
हम गीत उन्हीं के गुनगुनाएंगे॥
जन्मते रहें सदा ही इस देश में,
वीर जवान महाबली महा योद्धा। जो देश रक्षा में पीछे न हट के,
जन आजादी में अपना जीवन सौंपा॥
आज हम जी रहे उनकी वजह से,
आजादी का ये रंग-बिरंगा जीवन। जिसके हम कहलाते हैं निवासी,
करते आजादी लिए सुरंगा संजीवन॥
सर्वप्रथम अंग्रेज़ों के विरोध में,
खड़ी हुई वो थी महाराणी झांसी। आजादी की नायिका बनकर के,
जन को चेताकर खाई थी फांसी॥
आज करेंगे हम उनका गुणगान,
आओ मेरे भारतीयों करो स्वर प्रदान। कर नमन महाराणी लक्ष्मी बाई को,
हम स्वर फूल हमेशा उनको चढ़ाएंगे॥
देखों प्यारों,तुम…।
लगाकर अपनी जान की बाजी,
दिल में लगाए इक आस की थी। छुड़ा के छक्के अंग्रेजों के उन्होंने,
लोगों के उर में प्यास भरी थी॥
होने लगी मेरठ कानपुर अवध में,
और बरेली दिल्ली में चिंगारी।
तर-तर कर महाराणी झांसी ने,
कर डाली अंग्रेजों की शिकारी॥
जो रंग चुकी थी जनमानस में,
अपनी देशभक्ति का बेजोड़ रंग।
एक दिन षड्यंत्र कूटनीति रच के,
अंग्रेज़ों ने मिल के दिया तोड़ संग॥
छाई थी सबको भायी थी देश में,
झांसी फंसी अंग्रेजों के कैश में।
जिनका साहस चरित्र बताकर के,
त्यौहार हो कैसा उनके गीत सुनाएंगे॥ देखो प्यारों,तुम…।
फिर भी अपने बलिदान से वह,
अपना प्रतापी खौफ छोड़ गई ।
हो अमर के वीरों को जगाकर के,,
अंग्रेजों को आखिर तोड़ गई॥
आए उसके जैसे ही वीर जवान,
लड़ने को कदम-कदम हुए तैयार।
अंग्रेजों को लगे चटाने धूल फिर,
बन फौलादी करने लगे शिकार॥
खोल दिया संघर्ष भारी-भरकम-सा,
चारों तरफ फैल गई जंग ही जंग।
उन लाला तिलक विपिन घोष,
और बोस ने मिल के फैलाए रंग ही रंग॥
इन कांग्रेसियों ने अपनी चतुराई से,
अंग्रेजों को हिलाया अपनी खुदाई से।
लेकिन इनमें भी हो गए शहीद,
फिर क्यूं नहीं हमको याद आएंगे॥
देखो प्यारों,तुम…॥
दूसरी तरफ थे बिस्मिल-भगत,
आजाद अश्फाक सुखदेव और राजगुरु।
इन्होनें मिलकर के अंग्रेजों में,
भारी-भरकम किया काज शुरू॥
सत्य अहिंसा का मार्ग जिन्होंने,
अपनाया वो थे महात्मा गांधी।
जिनके साथ हो गए सगले उतारु,
पर जवानों को लगानी पड़ी फांदी॥
फिर भी रुके नहीं ये वीर जवान,
उनका जीना तर-तर कर डाला।
बम गोले बरसाकर के इन्होंने,
नसीब न होने दी मौत की माला॥
लेकिन गांधी के सत्य अहिंसा से,
उनको भी फांसी पर चढ़ना पड़ा।
देश को आजाद करवा के अपने,
रस्सी के फंदे से लटकना पड़ा॥
आजादी की थी ऐसी ये लड़ाई,
जिसमें वीरों ने अपनी जान लगाई।
अब हिंदवासी और ये रणदेव,
मिल के क्यों न गीत उनके गाएंगे॥
देखों प्यारों,तुम…।
सभी ने अपना तन-मन-धन देकर,
आजादी में कुछ न कुछ लगाया था।
उन सभी वीर जवानों को नमन,
जिन्होंने देश आजाद कराया था॥
अब तुम्हीं बताओं क्यों नहीं ,
हम उन वीर जवानों को याद करें।
आजादी के लिए अपना सर्वस्व दे के,
हमको हमेशा की खुशियां जो धरे॥
इस हिंद देश के संविधान ने,
विश्व में हमको प्रथम दर्जा दिया है
ऐसा निराला प्यारा देश है हमारा,
जो आन-बान से सदा जिया है॥
हम सबका ये प्यारा मतवाला,
हम सबका सीमा पर जवान रखवाला।
आओ हम सब उन जवानों के भी,
गौरव में नए-नवेले गीत सुनाएंगे॥
देखो प्यारों,तुम सुन लो मेरे यारों,
हम गीत शहीदों के गाएंगे।
जिनकी कुर्बानी ने आजादी दी है,
हम गीत उन्हीं के गुनगुनएंगे॥
#रणजीतसिंह चारण ‘रणदेव'
परिचय: रणजीतसिंह चारण `रणदेव` की जन्म तारीख १५ जून १९९७ और जन्म स्थान-पच्चानपुरा(भीलवाड़ा,राजस्थान) हैl आप लेखन में उपनाम `रणदेव` वापरते हैंl वर्तमान में निवास जिला-राजसमंद के मुण्डकोशियां(तहसील आमेट) में हैl राजस्थान से नाता रखने वाले रणजीतसिंह बीएससी में अध्ययनरत हैंl कविता,ग़ज़ल,गीत,कहानी,दोहे तथा कुण्डलिया रचते हैंl विविध पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित हुई हैंl आप समाजसेवा के लिए गैर सरकारी संगठन से भी जुड़े हुए हैंl लेखन का उद्देश्य-आमजन तक अपना संदेश पहुंचाना और समाज हित है।