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प्यार इक कसम, प्यारी सी रसम प्यार इंतज़ार, प्यार दीदार, प्यार दिलदार, प्यार सत्कार कभी-कभी तकरार। प्यार क्या है… प्यार इक आस, कभी ख़ुशी कभी उदास, कभी दूर, कभी पास कभी वर्तमान, कभी कभी इतिहास। प्यार क्या है… प्यार मनचला, कभी मिला कभी नहीं मिला, कभी सिला कभी गिला, कभी-कभी […]

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कहने को तो संत है,न आशा न राम, आचरण इनका देखिए,गुण्डों जैसे कामl गुण्डों जैसे काम,खुद ने यो कृष्ण बताए, दुराचार का धंधा,कब से रहो चलाएl जुड़ा नाम में राम,काम रावण ते बदतर, व्याभिचार में लीन,उमर हो गई बहत्तरl नहीं उमर की लाज,बच्ची वो पोती जैसी, शरम न आई इनको,नीयत […]

ऋषि-मुनियों की संस्कृति त्याग-तपस्या और आत्मज्ञान, आत्म साक्षात्कार सविवेक रखते सभी धर्म की टेक, यथावत् मर्यादा व्यवहार टिका उस पर सद् व्यवहार, हमारी आश्रम व्यवस्था का यही तो था आधार, ब्रह्मचर्य वानप्रस्थ सन्यास अर्थ संचय से रहते दूर, अर्थ ही अनर्थ की जड़ है मठाधिपति बने अर्थ के गढ़ है। […]

गरीब की आंखें पथराई-सी, देख रही है झोपड़ी में न खाने के लिए आटा, न पहनने को कपड़ा न मां की दवाई, न बहन का रिश्ता न भाई की पढ़ाई, और फटी-सी साड़ी में जीवनसंगिनीl खिलौने न होने पर बिलखते बच्चे, इतना देखा ही था के इन आंखों से बहने […]

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सुनो….. क्या जानते हो तुम एक औरत की खूबसूरती क्या है! नहीं जानते तुम सुनो……. खूबसूरती औरत की हर कहीं दिखाई देती है, उसमें कभी देखा है माँ को अपनी दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत, उसका बोलना उसकी आंंखें बरसाती प्यार तुम पर बोलकर भी बिन बोले भी उसका दौड़ना […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।