hr ये कौन चित्रकार है ? जो दिख नहीं पड़ता कहीं प्रकृृति के विशाल फलक पर है रंग भर रहा सभी ग्लेशियर पिघलकर बह निकला पहाड़ों से उतर मैदानों में गड्ढे में जमा हरा पानी मानों धरती की बेटी का हो हरा दुपट्टा गिरा हुआ। ऊँचे पहाड़ की चोटी से […]

 भारत ,जहाँ कहा जाता है “कोस-कोस पर पानी , तीन कोस पर बानी ” इस परिदृश्य में देश के विभिन्न भाषा -भाषाई जन को एक सूत्र में पिरोने वाली हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी की गरिमा ,मान -सम्मान, विश्वव्यापी पहचान और स्थान, पाठ्यक्रमों में हिंदी , राजकीय कार्य की भाषा हिंदी ,न्यायालयों […]

  अपनी कृपा की कोर दो वरदान दो वरदान दो | वागीश वीणा वादिनी करुणा करो करुणा करो | मुझको अगम स्वर ज्ञान का वरदान दो वरदान दो | निष्काम हो हर कामना मैं नित करूँ आराधना | मन का कलुष तम दूर हो वरदान दो वरदान दो | नव […]

सखी ! रहा कहां कब वह बसंत मधुमास का प्यारा वो बसंत बढ़े जंगल कंकरीट के अब खो गया उन्हीं में यह बसंत जब पीली सरसों के खेतों में  हम सखियाँ दौड़ लगाते थे चने ,मटर की मीठी बाली को घुसकर खेतों में सब खाते थे सखी कहां .. सखी […]

बर्दाश्त हो जाएगा किराए के घर में रहना जिसमें न छज्जा है, न बैठका, न बरजा बस! अंधी-अंधी दो ठिंगनी कोठरियाँ हैं बिना खिड़कियों और रोशनदानों वालीं जहाँ ततैये भी बचते हैं अपने घरौंदे बनाने से; बर्दाश्त हो जाएगा कर्ज़ में आकंठ डूबे हुए अपने घर में रहना जहाँ एक अदद कोठरी में ही अघा जाता है […]

संतो की वाणी में सत्य तो होता है . भगवान को भी  संतो की वाणी की रक्षा  करनी ही पड़ती है .संत मलूक दास जी के इस दोहे के संदर्भ में इन दिनो देश में तरह तरह की योजनायें चल रही हैं . अकर्मण्य और नकारा लोगों के हितार्थ सरकारें […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।