बहुत हुआ धरती का दोहन, अब तो शर्म करो ए मानव। दूषित हुआ है पर्यावरण, थोड़ी दया करो ए दानव॥ जिसने दी हो हरियाली, वो धरती माँ है कहलाती। जिसने जहर पीकर अमृत दिया, उस पर ही तूने अत्याचार किया॥ अब वो मीठी बयार नहीं है, ये मनुपुत्र का प्यार […]

मैंने गेहूँ के संग घुन पिसते देखा है, सियासत में लाचार किसान को मरते देखा है। सीमा विवाद में वीर जवान को मरते देखा है। मजहबी जंग में इंसानियत को मरते देखा है। जालिमों के बीच भोली जनता को फंसते देखा है। आज न कहेंगे हम कौन दोषी हैं, कौन […]

आओ नवयुग निर्माण करें हम, नन्हें पंछी पर में नई उड़ान भरें हम। माटी को दिया बनाएं हम, जग के अंधियारे को दूर करें हम। नई उमंग और उत्साह से, सत्र का स्वागत करें हम। फूलों को खिलाना सिखाएं, मासूम मुख को हंसना सिखाएं। मन में एक ज्योत जलाएं, शारदे […]

मेरी नींद को दिक्कत न भजन से है, न अजान से है, मेरी नींद को दिक्कत पिटते जवान और मरते किसान से है। मेरी नींद को दिक्कत न मंदिर से है, न मस्जिद से है, मेरी नींद को दिक्कत तंबू में बैठे मेरे भगवान से है। मेरी नींद को दिक्कत […]

याद आते हैं वो दिन सुहाने, बचपन के वो पल मस्ताने। मोहल्ले भर में था हुड़दंग, मैं भी मिला था सबके संग। जब भी कोई खिड़की टूटती थी, हमें अपनी जीत दिखती थी। रोज रहता था छुट्टी का इंतजार, आता था जब इतवार। न भूख हमको सताती, न प्यास की […]

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बेटा अपने वृद्ध पिता को रात्रि भोज के लिए अच्छे रेस्टॉरेंट में लेकर गया। खाने के दौरान वृद्ध पिता ने कई बार भोजन अपने कपड़ों पर गिराया। रेस्टॉरेंट में बैठे खाना खा रहे दूसरे लोग वृद्ध को घृणा की नजरों से देख रहे थे,लेकिन वृद्ध का बेटा शांत था। खाने […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।