भय के बादल छँट जाने दो, प्रेम की अब बात हो। अलविदा कहो आतंकी रात को, एक नया प्रभात हो। गोली चली,खून बहा.. ज़मीं भी लाल हो गई। हर चप्पा खामोश हुआ, हर गली वीरान हुई। फिर से गूँजे पूजा के सुर, प्रेम की अज़ान हो। अलविदा कहो आतंकी रात […]

जब शाम का सूरज, टाँक रहा होता है पश्चिम में चित्र खूब धूसर, चटक लाल रंग से.. जब धूप थके पाँव लौटने लगती है घर को, तब आकाश थोड़ा नरम होकर फैला लेता है अपनी बाँहें। तब धुंधलका उसकी बाँहों से छूटकर, फैल जाता है पूरी धरती पर, तब हवा […]

सोने से पहले लिखा गया मेरा वो आखिरी शेर ; एक पूरे सादे कागज पर तुम्हारे नाम का शेर.. रात भर देता रहा आवाजें। और वहीं पड़ी एक कलम थी, कोशिश करती रही जो खुद-ब-खुद लिख जाने की। मैं सोया था, बिस्तर पर एक किनारे, और जो बह रहा था […]

भारतीय स्टेट बैंक ने ग्राहक सेवा को बेहतर जाना और हिन्दी की शक्ति को माना है,इसके लिए भारतीय स्टेट बैंक के प्रबंधन को बधाई देता हूँl हमारे एक मित्र जो,भारतीय स्टेट बैंक के ग्राहक हैं और पिछले काफी समय से यह माँग कर रहे हैं कि नेट बैंकिंग संबंधी तमाम […]

दोस्तों,आज के इस कलयुगी और मायाचारी संसार में हम और आप अपनी संस्कृति को बिलकुल से ही खो चुके हैं।पश्चिमी सभ्यता को अपने जीवन के साथ अपने घरों में भी सजाने और व्यवहार में अपनाने लगे हैं। इस चक्कर में भारतीय सभ्यता और संस्कृति को पुरानी व रूढ़िवादी बताते हुए […]

चंचल चित्त,चितेरा होना चाहता है, मन मस्त,मगन मुग्ध होना चाहता है। फ़ितरत फ़िसलने की है इस दिल की, बावरा बस बरबस,बहकना चाहता है। दिल हरदम सच्चा होना चाहता है, फिर एक बार बच्चा होना चाहता है। ऊपर से कितना भी शरीफ़ जान पड़े, अंतर्मन से बस चहकना चाहता है। बंद […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।