पानी

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devendr soni
हमेशा की तरह ही
त्रस्त हैं लोग
सूखते रिश्तों से
आँखों के घटते पानी से
और
गिरते भू जल स्तर से ।

रिश्ते और पानी जीवन है ।

इनका निरंतर घटते रहना
सिर्फ
घटना ही नही है ,
यह है
हमारी उस प्रवृत्ति का प्रतिफल
जिसने हमे बना दिया है
प्रकृति और रिश्तों के प्रति
उदासीन और लापरवाह ।

भोग तो रहे ही हैं हम
इसका भारी दुष्परिणाम
पर
सबसे ज्यादा भोगेगी इसे
हमारी आने वाली वह पौध
जिसे हमने दे रखीं है
संस्कार विहीन सुविधाएं अंनत
और कर दिया है प्रकृति तथा
परिवार से विलग।

हम खरीदना चाहते हैं
पैसे से हर ख़ुशी
पर क्या करेगा पैसा भी
जब हमारे अपने संस्कारों मे
आँखों में
और धरा में भी
होगा ही नही पानी ।

वक्त अभी भी है
हम करें रक्षा प्रकृत्ति की,
परिवार की और रिश्तों की ।

सिखाएं बच्चों को भी यह
कि रिश्तों की जमीन में भी
रमता है पानी
धरा की ही तरह ।

जिस दिन सीख जाएंगे
उनके साथ ही
हम भी यह सब
रह जाएगा
आँखों में भी पानी
रिश्तों में भी पानी
धरा और अम्बर में भी पानी ।
#देवेंन्द्र सोनी , इटारसी

matruadmin

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।