किताबे रो रही थी

nirvisha

इन रिमझिम बारिश कि सिसकियो में
मुझे एक और सिसकी सुनाई दे रही है
हा,  इन बून्दो कि गपशप मे
मुझे एक और झीडकी सुनाइ दे रही है

वो किताबे कुछ कहना चाहती है
जो मेरी अलमारी मे अस्त व्यस्त पडी है
पर कैसे समझु मे उनकी बाते
जो मुझे समझ चुकी है

शायद वो कहना चाहती है
छोड दो मुझे इस बारिश मे भीगने को
मैं वहा चली जाना चाहती हु
जहा से तुम मुझे लाइ हो
मैं उन पेडो के पास जाना चाहती हु
जहाँ से मे जन्मी हु
उस हवा को महसुस करना चाहती हु
इन पेडो के संग झुमना चाहती हु

मै सम्मोहित हो उठी
किताबे हाथ मे ले बाहर आइ
बारिश थम चुकी थी
मैने किताबो को देखा
इक्का दुक्का पानी कि बून्दे फ़िसल रही थी
किताबे रो रही थी|

नाम :- निर्विशा नागदा
वर्तमान पता:- मनासा 
जिला :- नीमच 
मध्य प्रदेश 
शिक्षा:- B.sc अंतिम वर्ष 
कार्यक्षेत्र:- कोचिंग सन्चालन 
विधा:- 
कविता और कहानी 

अभी तक सिर्फ विद्यालय और महाविधालय कि और से प्रकाशित पत्रिकाओ मे कुछ कविता कहानी प्रकाशित हुई है ,और बस वही से प्राप्त कुछ प्रशस्ति पत्र है ,अञ कोई सम्मान नहीं|

लेखन का उद्देश्य:- 
मेरे लेखन का उद्देश्य है लेखन के माध्यम से समाज मे समानता व विभिन्न मुद्दों के प्रति सकारात्मकता लाने का प्रयत्न और नारीवाद को हिन्दी रुप से सशक्तता प्रदान करना है|

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।