
एक आकलन कारणों पर बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में फिल्मी ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है फ्लॉप दर फ्लॉप फिल्मो की भरमार होती जा रही है| आज इसी विषय पर बात होगी की ऐसे क्या कारण है कि बॉलीवुड की फिल्मों से दर्शक दूर होते जा रहे है इसके कुछ मूल कारण है |जबकि किसी वक्त में पहला शो देखने लोग कपड़ा लेकर दर्जी के वहा देते हुवे जाते थे और शो देख कर हीरो के शर्ट की नकल सीलवा कर पहन कर आ जाते थे हीरोइन की ड्रेस , हेयरकट, ज्वेलरी, गाड़ियों तक कि नकल की गई है दर्शको की दीवानगी की हद थी यह भारत मे फिल्मे शुरू से दर्शको के लिए धर्म और मनोरंजनकी तरह रही है भारतीय दर्शकों ने सिनेमा को हद से आगे जाकर मांन सम्मान और प्यार दिया है लेकिन वही दर्शक बॉलीवुड फिल्मों से अब किनारा करने लगा है और फिल्मे हिट तो क्या दर्शको को सिनेमाघरों तक नही ला पा रही हैयही दर्शक हॉलीवुड फिल्मो ओर टॉलीवुड फिल्मो की तरफ रुख करने लगे— क्यो इन्ही कारणों पर आज की चर्चा होगी परन्तु दर्शक अपनी फिल्म पिपासा को शांत तो करेगा ही तो वह हॉलीवुड ओर टॉलीवुड की तरफ निकल गए है इससे यह हुवा की हॉलीवुड फिल्मों की टिकट खिड़की भी भरपूर कलेक्शन दे रही है और टॉलीवुड भी इसके उदाहरण है हॉलीवुड की जंगल बुक ने भारत मे 140 करोड़ ₹, फास्ट ओर फ्यूरियस 7/8 क्रमशः 100/80 करोड़ भारतीय दर्शकों ने कमाई दी है भारत मे जंगल बुक के सामने शाहरुख की फैन लगी थी जो कि फ्लॉप साबित हुई इधर साउथ टॉलीवुड में विनेगम, स्पाइडर, जय लव कुशा ने रीजनल फिल्मे होने के बाद भी 100 करोड़ क्लब में आसानी से दाखिल हो गई मुझे लगता है कि बॉलीवुड में रचनात्मकता की कमी हो गई है नए विषय नए विचारों पर काम करने पर शिथिलता सी आ गई है दूसरी वजह भाई भतीजा वाद या स्टार बच्चों के साथ फ़िल्म बनाना नए टेलेंट को मौका न मिलना स्टार पुत्रो/पुत्रियों के साथ फ़िल्म बनाना भी एक वजह है बॉलीवुड के गिरते ग्रॉफ की क्योकि सारे स्टार बच्चे तो मुकम्मल अभिनय नही कर पाते है दर्शक का मोह भंग हो रहा है यह भी एक कारण है | एक ओर वजह बॉलीवुड फिल्मों की हीरोइन्स यानी अदाकारा कई अदाकारा तो ऐसी है जिन्हें हिंदी आती ही नही जैसे कैटरीना, जैकलीन, नरगिस फाखरी सन्नी लियोनी जिन्हें हिंदी आती ही नहीं तो दर्शक उनसे खुद को कैसे जोड़ पाएगे ओर तो और पाकिस्तानी कलाकारों को कास्ट करना जितनी पाकिस्तान की आबादी है उतने तो मेरे देश मे संघर्षरत अभिनेता/अभिनेत्रियां है एक यह भी बड़ी वजह है बॉलीवुड के दर्शक हॉलीवुड या टॉलीवुड की तरफ मूड गए है मेरे हिसाब से एक ओर वजह है बॉलीवुड फिल्मों में स्टार कास्ट कई निर्माता निर्देशक बड़े स्टार्स को अनुबंधित कर लेते है पहले उसके बाद विषय, स्टोरी, पटकथा पर काम करते है जबकि होना यह चाहिए कि स्टोरी, पटकथा सब रेडी हो तब स्टार्स को अनुबंधित किया जाए क्योकि पहले स्टार्स साइन कर लिए जाते है तो स्टोरी, कंटेंट, पटकथा उनके हिसाब से लिखी और बनाई जाती है तो उसमें झोल आना लाज़मी है
रिस्क फैक्टर
बॉलीवुड अंग प्रदर्शन, सेक्स, कॉमेडी पर फिल्मे निकालने में लग गया है रचनात्मकता पर से ध्यान हटता जा रहा है बॉलीवुड फिल्मों में जो रहन सहन , सामाजिक परिदृश्य दिखाया जाता है उससे दर्शक खुद को बांध या जोड़ नही पाता है तो दूर होना लाजमी है उधर साउथ में मानवीय मूल्यों, रिश्ते नातो को इतनी खूबसरती मानवीय चीतृण किया जाता है कि दर्शक खुद से जोड़ लेता है यह भी एक बड़ा कारण है बॉलीवुड से दर्शकों के दूर होने का बॉलीवुड में नए ओर फ्रेश कंसेप्ट पर काम और प्रोत्साहन मिलता ही नही उदाहरण के तौर पर सरबजीत के लिए रणदीप हुड्डा ने कमाल का अभिनय किया लेकिन कोई प्रोत्साहन नही मिला न ही कोई अवार्ड शो में नामांकन मिला ठीक इसी तरह रुस्तम, एयर लिफ्ट के लिए अक्षय कुमार ने लाजवाब काम किया लेकिन फ़िल्म फेयर में एक भी नामांकन तक नही मिला तो यह साबित हुवा कि नए ओर फ्रेश कंसेप्ट को बॉलीवुड इंडस्ट्री रिस्क मानती है यह एक सबसे बड़ा कारण है दर्शको को खोने का
#इदरीस खत्री
परिचय : इदरीस खत्री इंदौर के अभिनय जगत में 1993 से सतत रंगकर्म में सक्रिय हैं इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं| इनका परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग 130 नाटक और 1000 से ज्यादा शो में काम किया है। 11 बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में लगभग 35 कार्यशालाएं,10 लघु फिल्म और 3 हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। इंदौर में ही रहकर अभिनय प्रशिक्षण देते हैं। 10 साल से नेपथ्य नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं।