रोज पढ़ता हूं तेरा चेहरा…

vandana
है वफ़ा मेरी मुकम्मल इक रिवायत की तरह,
काश आते ज़िन्दगी में तुम इनायत की तरह।
तुझसे मिलना बन्दगी से कम नहीं हर्गिज़ सनम,
मैंने देखा है सदा तुझको इबादत की तरह।
अश्क तेरे मुझसे हरगिज़ छुप नहीं सकते कभी,
रोज़ पढ़ता हूँ तेरा चेहरा किसी ख़त की तरह।
नाम लेकर मैं उसी का काम करता हूँ शुरू,
ज़िन्दगी में अब भी शामिल है वो मुहरत की तरह।
देर से तो देर से मय्यत पे मेरी आया तो,
या मुहब्बत की तरह से या शिकायत की तरह।
छू सका उसको न पाने की ही की कोशिश कभी,
क़ैद दिल में मुद्दतों से था अमानत की तरह।
महजबीं की सिम्त मैंने गुल उछाला था कभी,
सर हिलाया उसने अपना भी इजाज़त की तरह।
आख़िरश आ ही गई वो शाम आँगन में मेरे,
साथ चल दी ज़िन्दगी उसके शराफ़त की तरह।
बोलता दिन-रात सर चढ़कर नशा इक ‘वन्दना’,
कौन क़ाबिज़ है ज़ेहन पर मेरे शौहरत की तरह॥

                #वंदना मोदी गोयल

परिचय : वंदना मोदी गोयल, फरीदाबाद में रहती हैं। शिक्षा एमए(हिन्दी)और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है।प्रकाशित कृतियों में उपन्यास ‘हिमखंड,’छठापूत’ सहित सृजन सागर कथा संग्रह,साझा संकलन आदि हैं। आपकी साहित्यिक उपलब्धियों में पिरामिड शीरी सम्मान, काव्य गौरव सम्मान,सारस्वत सम्मान,
साहित्य रतन सम्मान और मुक्तक सम्मान प्रमुख हैं,साथ ही आप मंच पर काव्य पाठ भी करती हैं। अच्छा साहित्य पढ़ना और पुराने गाने सुनना आपका शौक है।

matruadmin

Next Post

ताज बेमिसाल

Mon Feb 19 , 2018
बनाकर ताज शाहजहां ने, दुनिया को  तोहफा दिया है।  हर आशिक की यादों में,  मुमताज को जिंदा कर दिया है॥  संगमरमर से तराशा है,  मुहब्बत की निशानी को।  जज्बातों से लिख दिया,   प्यार की कहानी को॥  मिसाल ए मुहब्बत को,   रूबरू-ए-दुनिया रख़ दिया है।  हर आशिक की यादों […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।