यूँ ही कभी…

rashmi thakur

तुम किसी रोज मेरे पास आओ कभी,
मुझपे जरा हक़ जताओ तुम कभीl 

             माना हैं दरमियां मीलों के फासले,
अहसासों में तो गले लगाओ तुम कभीl 

निहारती हूँ रोज आईने में खुद को,
शीशे में भी नजर आओ तुम कभीl 

             हम तो महकती खुशबू से हैं सदा,
खुशबू बन साँसों में उतर जाओ तुम कभीl 

ख़्वाबों में तुम सदा होते हो साथ मेरे,
सोते हुए किसी रोज यूँ जगाओ तुम कभीl 

              पाती हूँ ख़ुद को अँधियारों में ही अक्सर,
आकर अचानक दीप जलाओ तुम कभीl 

राहें आसान नहीं जीवन की तुम बिन,
उलझनों को आकर के सुलझाओ तुम कभीl 

                 सर्दियों में ठिठुरती हूँ ओस की बूंदों-सी,
सूरज-सा आकर ताप दे जाओ तुम कभीl 

तुम बादल हो मैं हूँ धरती प्यासी-सी,
पानी की बूंदें बन प्यास बुझाओ तुम कभीl 

                   दूरियों की परवाह न किया करो तुम,
यादों में आकर रूह में उतर जाओ तुम कभीll 

             #रश्मि ठाकुर

परिचय: रश्मि ठाकुर पेशे से शिक्षक हैं और कविताएँ लिखने का शौक है।आप मध्यप्रदेश के दमोह जिले के खमरिया(बिजौरा) में रहती हैं।लिखने का शौक बचपन से ही है,पर तब समय नहीं दे पाई। अब फिर से प्रेम विरह की रचनाओं पर पकड़ बनाई और प्रेम काव्य सागर से सम्मानित किया जा चुका है। पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित होती रहती है। सोशलिस्ट मीडिया पर भी आप सक्रिय हैं। रश्मि ठाकुर की जन्मतिथि-३ सितम्बर १९७७
तथा जन्म स्थान-खमरिया (दमोह) है। बी.ए.,एम.ए. के साथ ही बी.एड करके शिक्षा को कार्यक्षेत्र(स्कूल में सामाजिक विज्ञान की शिक्षिका)बना रखा है। आपके लेखन का उद्देश्य-झूठ छल फ़रेब औऱ अपने आसपास हो रही घटनाओं को नज़र में रखते हुए उनका वास्तविक चित्रण रचनाओं के माध्यम से करना है।

 

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