सतत प्रवाहित रहती,
यह जीवन धारा बहती।
ऊषा के संग उठ मुस्काती,
किरणों के संग नर्तन करती
दानों की आशा करते,
चूजों के संग कलरव
करती।
तरुपल्लवों को झुलाती मंद पवन,
कलियों की मुस्कान से सुरभित उपवन
चिड़िया चीं-चीं कर,
एक दूजे को पुकारती
नन्हें पंखों को फैलाकर,
नभ को नापना चाहती।
उतुंग गिरि शिखर सदा,
ऊंचा उठने को कहते
अडिग रह अपने लक्ष्य पर,
आगे बढ़ने को पुकारते
बादलों से बरस बूंदें,
आशा को खूब संवारती
तपती धरती को शीतल कर,
उसकी तृषा निवारती।
वेग सरिता का कहता,
संग-संग बढ़ने को
संघर्षों को पार कर,
मंजिल को पा जाने को
निर्झर की कल-कल,
सजग राह संवारती
श्रमशील हो चलते रहो,
मंजिल तुम्हें पुकारती
सतत प्रवाहित रहती,
जीवन की धारा बहती।
#पुष्पा शर्मा
परिचय: श्रीमती पुष्पा शर्मा की जन्म तिथि-२४ जुलाई १९४५ एवं जन्म स्थान-कुचामन सिटी (जिला-नागौर,राजस्थान) है। आपका वर्तमान निवास राजस्थान के शहर-अजमेर में है। शिक्षा-एम.ए. और बी.एड. है। कार्यक्षेत्र में आप राजस्थान के शिक्षा विभाग से हिन्दी विषय पढ़ाने वाली सेवानिवृत व्याख्याता हैं। फिलहाल सामाजिक क्षेत्र-अन्ध विद्यालय सहित बधिर विद्यालय आदि से जुड़कर कार्यरत हैं। दोहे,मुक्त पद और सामान्य गद्य आप लिखती हैं। आपकी लेखनशीलता का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है।
Thu Jan 25 , 2018
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