इंसान का ज़मीर गिर जाए तो,कोई शिखर कभी काम नहीं आता।
मौत हकीकत है इसे मिटाने में,कोई हुनर कभी काम नहीं आता॥
अनगिनत अरमानों की कशमकश को, ता-उम्र ढोता आया हूँ।
खुशियों के काफिलों के लिए ता-उम्र रोता आया हूँ॥
मंजिल का ठिकाना नहीं तो,कोई सफर कभी काम नहीं आता।
मौत हकीकत है इसे मिटाने में कोई हुनर कभी काम नहीं आता॥
उस निराधार अनीति की परवरिश,तब करना ना छोड़ सका।
और हकीकत जानकर हकीकत पे शक करना न छोड़ सका॥
कर्म ही खराब हो तो,दुआ का असर कभी काम नहीं आता।
मौत हकीकत है,इसे मिटाने में कोई हुनर कभी काम नहीं आता॥
#कुलदीप खदाना
परिचय : कुलदीप खदाना पेशे से फौजी हैं। इनके पिता-बांके सिंह भी फौजी(अब स्व.)रहे हैं। इनकी जन्म तारीख-२-फरवरी-१९८७ और जन्म स्थान-बुलन्दशहर है। वर्तमान पता-पोस्ट-खदाना,जिला-बुलन्दशहर(उत्तर प्रदेश) है।बी.ए. तक शिक्षित श्री खदाना का कार्यक्षेत्र-पैरा मिलिट्री (एसएसबी)है। आपके लेखन का उद्देश्य-शौक ही है।