वसन्त उत्सव ये आया है,
खुशी के गीत गाओ तुम।
खिली सरसों ने फैलाई,
चुनर रंगीन धरती पे।
अमुवा की भी डाली आज,
बैरों से है लहराई।
खिले पलाश है देखो,
चमन भी है महकाया।
कोयल और पपीहा भी,
गाए मस्त तराने आज।
प्रकृति ने भी ओढ़ी है,
मखमली चादर आज।
तू बल बुद्धि हमें देना,
तुझे पूजे सभी जन आज॥
#प्रमोद बाफना
परिचय : प्रमोद कुमार बाफना दुधालिया(झालावाड़ ,राजस्थान) में रहते हैं।आपकी रुचि कविता लेखन में है। वर्तमान में श्री महावीर जैन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय(बड़ौद) में हिन्दी अध्यापन का कार्य करते हैं। हाल ही में आपने कविता लेखन प्रारंभ किया है।
Mon Jan 22 , 2018
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