कागजी तितली

durgesh
ठिठुरन-सी लगे सुबह के हल्के रंग-रंग में।
जकड़न भी जैसे लगे देह के अंग-अंग में॥
उड़ती-सी लगे धड़कन आज तो आकाश में।
डोर भी है हाथ में,हवा भी है आज साथ में॥
पर कागजी तितली लगी सहमी-सी,l उड़ने की शुरुआत में॥
फैलाए नाजुक पंख,थामा डोर का छोर।
हाथ का हुआ इशारा,लिया डोर का सहारा॥
डोली इधर से उधर,गई नीचे से ऊपर।
भरी उमंग से उड़ने लगी जब हुई उड़ती तितलियों के साथ में॥
बतियाती जा रही है,पंछियों के पँखों से।
होड़-सी ले रही है,ज्यों आसमानी रंगों से॥
हुई थोड़ी अहंकारी,जब देखी अपनी होशियारी।
था दृश्य भी तो मनोहारी,ऊँची उड़ान थी भारी॥
डोर का भी रहा सहारा।
हाथ करता रहा इशारा॥
तभी लगी जाने किसकी नजर।
एक पल में जैसे थम गया प्रहर॥
लग रहे थे तब हिचकोले।
यों लगा जैसे संसार डोले॥
डोर से डोर थी अब कट गई।
इशारे की बिजली भी झट से गई॥
अब तो हवा भी न दे पाई सहारा।
घड़ी दो घड़ी का था अब खेल सारा॥
ऊँची ही ऊँची उड़ने वाली अब नीचे ही नीचे आई।
जो आंखें मदमा रही थी अब तक उनमें अंधियारी थी छाई॥
तभी उसे लगा एक तेज झटका।
डोर लगी तनी-सी हुआ जैसे खटका॥
डोर का पुनः मिल रहा था सहारा।
हाथ और थे पर मिल रहा था इशारा॥
फिर उड़ी आकाश में तब बात समझ ये आई।
बिना सहारे-बिना इशारे न होगी आसमानी उड़ाई॥
             #दुर्गेश कुमार
परिचय: दुर्गेश कुमार मेघवाल का निवास राजस्थान के बूंदी शहर में है।आपकी जन्मतिथि-१७ मई १९७७ तथा जन्म स्थान-बूंदी है। हिन्दी में स्नातकोत्तर तक शिक्षा ली है और कार्यक्षेत्र भी शिक्षा है। सामाजिक क्षेत्र में आप शिक्षक के रुप में जागरूकता फैलाते हैं। विधा-काव्य है और इसके ज़रिए सोशल मीडिया पर बने हुए हैं।आपके लेखन का उद्देश्य-नागरी की सेवा ,मन की सन्तुष्टि ,यश प्राप्ति और हो सके तो अर्थ प्राप्ति भी है।

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मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।