हाथों की लकीरें

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जब भी बैठती हूँ,
खुद के साथ अपनी
हथेलियों को बड़े गौर
से देखती हूँl

आड़ी-तिरछी इन लकीरों,
में न जाने क्या खोजती हूँl

सिकोड़कर कुछ गाढ़ी,
खिंची लकीरों की गहराई
नापती हूँl
पता नहीं,इन गहराइयों में,
खुद को कहाँ तक डूबा
देखती हूँ ??

सोचती हूँ,क्या सच में मेरी,
ज़िन्दगी इन रेखाओं से
आकार पाती है,
मेरी मुट्ठी में रहकर
भी मेरी किस्मत,
मुझे नचाती हैll 

जो गुज़र गया वह भी तो,
दर्ज होगा यहीं,
पता चल जाए कहाँ ?
तो मिलाऊँ के,जो खिंचा था,
जी आई हूँ वहीl

अजब दस्तकारी है
खुदा की,
इंसा की जिन्दगी
उसकी ही
हथेलियों में पहेलियों-सी 

सजा दी,
कुंजी,कर्मों के गहरे
समन्दर में गिरा दीl

किसी तिलिस्मी कहानी
की तरह,
हर रोज़ नए मक़ामों
से गुज़रती हूँ,
एक से उबर दूसरे में
जा फंसती हूँl

कभी दो घड़ी मिली
फुरसत तो बैठकर,
हथेलियां तकती हूँ
इन उलझी लकीरों
को समझने की,
एक नाकाम कोशिशें
करती हूँll  

          #लिली मित्रा

परिचय : इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर करने वाली श्रीमती लिली मित्रा हिन्दी भाषा के प्रति स्वाभाविक आकर्षण रखती हैं। इसी वजह से इन्हें ब्लॉगिंग करने की प्रेरणा मिली है। इनके अनुसार भावनाओं की अभिव्यक्ति साहित्य एवं नृत्य के माध्यम से करने का यह आरंभिक सिलसिला है। इनकी रुचि नृत्य,लेखन बेकिंग और साहित्य पाठन विधा में भी है। कुछ माह पहले ही लेखन शुरू करने वाली श्रीमती मित्रा गृहिणि होकर बस शौक से लिखती हैं ,न कि पेशेवर लेखक हैं। 

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Sat Jan 13 , 2018
मैं बहती कलरव करती, टिमटिमाती बूंदों के साथ। बहाकर लाती पहाड़ी कहानी, युगों-युगों से लेकर साथ। हरे-भरे पहाड़ों के, हृदय चीरकर लाती हूँ, गुनगुनाती हूँ जनजाति के दुख-सुखों का संगीत। पत्थरों पर टकराकर भी, चम-चम नाचती पावन मीठा जल लेकर, सबको पिलाती। मेरी ही स्पर्श से धरती ने हरियाली, चादर […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।