सत्रह साल के दिसम्बर 

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प्रिय सत्रह साल के दिसम्बर
एक गुजारिश है तुझसे,
वैसे मांगने की कोई जरुरत नईं ,
पर मेरी इंसानी फितरत ही है…
किसी-न-किसी से कुछ-ना-कुछ,
मांगते ही रहने की माता से,पिता से,
भाईयों से,बहनों से,दोस्तों
गुरूजनों से,अनाकलनीय शक्ति से,
भगवान से,ईश्वर से,अल्लाह से…
परमपिता से,और न जाने किस-किस से…
लेकिन बहुत कुछ मांगता नहीं हूं मैं तुझसे…
जाते-जाते मुझे खुशियों का नया साल दे…
मेरे देश के सैनिकों को भरोसा दे…
इस धरती के किसानों को दे हौंसला…
न लें वो कोई जिंदगी का गलत फैसला…
भूखों को खाना दे,
बेघरों को आसरा दे…
लावारिसों को वारिस,
अनाथों को नाथ दे..
अनाज इतना पैदा हो कि,
न रहे कोई भूखा यहां पर
इतनी फसलें पैदा करने की,
शक्ति मेरे किसानों को दे…
जात-धर्म का भेद मिटाकर,
स्त्री-पुरुष को समान न्याय दे…
राजनेताओं को लालच से मिले छुटकारा…
देश की अवाम और देश हो उनको प्यारा…
भूल जाएं वो दलों का बंटवारा…
जनता और देश के विकास का हो नारा…
सबको मिले शांति और अमन,
खुशियों से भर दे सबका दामन…
बांट सके हर कोई खुशियां,
कि कोई न रहे गमगीन यहां…
छोटी-सी ज़िंदगी है हर किसी की,
हर बात में खुश रहें सब हम…
कोई चेहरा किसी के पास न हो,
उसकी आवाज में खुश वो रहे…
गर कोई रुठा हो किसी से…
गर लौट के आने वाला नहीं,
उनकी याद में खुश रहे…
बस यही कामना करता हूं तुझसे…
देश मेरा सुजलाम रहे,
देश मेरा सुफलाम रहे…
हे सत्रह साल के दिसम्बर,
यही गुजारिश है तुझसे…
यही गुजारिश है तुझसे…॥

#संजय वासनिक ‘वासु’

परिचय : संजय वासनिक का साहित्यिक उपनाम-वासु है। आपकी जन्मतिथि-१८ अक्तूबर १९६४ और जन्म स्थान-नागपुर हैl वर्तमान में आपका निवास मुंबई के चेंबूर में हैl महाराष्ट्र राज्य के मुंबई शहर से सम्बन्ध रखने वाले श्री वासनिक की शिक्षा-अभियांत्रिकी है।आपका कार्यक्षेत्र-रसायन और उर्वरक इकाई(चेम्बूर) में है,तो सामाजिक क्षेत्र में समाज के निचले तबके के लिए कार्य करते हैं। इकाई की पत्रिका में आपकी कविताएं छपी हैं। सम्मान की बात करें तो महाविद्यालय जीवन में सर्वोत्कृष्ट कलाकार-नाटक सहित सर्वोत्कृष्ट-लेख से विभूषित हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-शौकिया ही है।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।